शाहजहांपुर/मदनापुर। जिले में सक्रिय मिलावट के धंधेबाजों ने नकली जीरा और नकली सौंफ बनाने के बाद अब नकली काली मिर्च भी बाजार में उतार दी है। मुनाफे के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे मिलावटखोरों का यह कारनामा काली मिर्च के नमूनों की जांच से सामने आया है। जांच में पता चला कि जिसे काली मिर्च बताकर बेचा जा रहा है, वह पिचका मटर है। उस पर काली पॉलिश करके काली मिर्च बनाया गया है। मिलावटखोरी पकड़ में न आए, इसके लिए धंधेबाज असली काली मिर्च में 35 से 40 फीसदी नकली काली मिर्च को खपाते हैं।
पिछले साल मदनापुर क्षेत्र के बरुआ पट्टी सनायक गांव से भारी मात्रा में बरामद हुई नकली काली मिर्च के नमूनों की राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला में हुई जांच से पता चला कि धंधेबाजों ने पिचका मटर के दानों को सुखाकर और उन पर अखाद्य काले रंग की पॉलिश करके उसे काली मिर्च बना लिया। जांच में काली मिर्च का नमूना मानव स्वास्थ्य के लिए घातक बताकर फेल कर दिए जाने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) ने मिलावट के मुख्य धंधेबाज के खिलाफ सक्षम न्यायालय में मुकदमा दायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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इसलिए गहराया काली मिर्च के नकली होने का संदेह
काली मिर्च 700 से 800 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रही है, लेकिन नकली काली मिर्च का धंधेबाज जलालाबाद और मदनापुर के कुछ किराना कारोबारियों को 300 से 400 रुपये किलो के भाव पर काली मिर्च देने लगा। मसालों समेत खान-पान की सभी वस्तुओं की थोक और फुटकर दरों में अधिकतम 10 से 15 प्रतिशत का ही अंतर रहता है, इसलिए दुकानदारों को काली मिर्च के नकली होने का संदेह हुआ। बाद में ग्राहकों से काली मिर्च में स्वाद न होने की शिकायत मिलने पर दुकानदारों ने पुलिस को सूचना दी।
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भारी मात्रा में बरामद हुई थी नकली काली मिर्च
जलालाबाद पुलिस ने गत वर्ष 16 अगस्त को मदनापुर पुलिस के साथ बरुआ पट्टी सनायक गांव के एक मकान पर छापा मारकर नकली काली मिर्च का कारखाना पकड़ा था। पुलिस ने वहां बोरों में भरी रखी करीब 8.5 क्विंटल नकली काली मिर्च समेत करीब 25 क्विंटल हरी मटर के दाने बरामद किए थे। पुलिस ने गांव के ही मुख्य धंधेबाज कारखाना संचालक पट्टे गुप्ता समेत जलालाबाद क्षेत्र के गांव जमाना निवासी अनिल कुमार, सोने लाल व हरिनाथ और इसी थाना क्षेत्र के गांव नौसारा निवासी आनंद गुप्ता को गिरफ्तार किया था।
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इस तरह पहचानें काली मिर्च में मिलावट
एफएसडीए के अधिकारियों के अनुसार काली मिर्च की कीमत जैसे-जैसे बढ़ रही है, उसमें पपीता के बीज की मिलावट भी बढ़ती जा रही है। पपीता बीज भूरा-काला और अंडाकार होता है, जबकि काली मिर्च का दाना काला, चिकना और गोल होता है। अल्कोहल में डालने पर पपीता बीज तैरने लगेगा, जबकि काली मिर्च सतह पर बैठ जाएगी। पानी में डालने पर अगर रंग छूटे तो काली मिर्च नकली है। नकली काली मिर्च के इस मामले में धंधेबाज ने मिलावट छिपाने के लिए हरी मटर का इस्तेमाल किया क्योंकि वह पपीता बीज की तुलना में भारी होती है। असली काली मिर्च की सतह पर सिकुड़ने के निशान होते हैं, इसलिए पिचका मटर के बीजों को सुखाकर और उन्हें काले रंग से रंगकर असली काली मिर्च जैसा बनाया गया।
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जानलेवा हो सकती है अखाद्य रंग की मिलावट
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राजीव सिंह के अनुसार मिठाई और मसालों में मिलाया गया कोई भी अखाद्य रंग पेट में जाने से न सिर्फ पाचन तंत्र प्रभावित होता है, बल्कि नर्वस सिस्टम (स्नायु तंत्र) भी खराब होता है क्योंकि उनमें लेड और आर्सेनिक जैसे घातक और जहरीले तत्व शामिल होते हैं। पेट के रास्ते शरीर में ये तत्व पहुंचने पर आमाशय और आंतों में सूजन के साथ लिवर को नुकसान होता है और मानसिक विकार पैदा हो सकते हैं। बेहतर होगा कि मसाले अपने भरोसेमंद दुकानदार से खरीदें और पिसे हुए मसालों के पैकेट इस्तेमाल करने के बजाय उन्हें खुद पीसकर दैनिक उपयोग में लाएं।
वर्जन
काली मिर्च का नमूना जांच में नकली प्रमाणित होने पर कारखाना संचालक के खिलाफ अपर जिला जज के न्यायालय में भारतीय खाद्य सरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 26/59 के तहत मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। इसमें कारावास की साथ जुर्माना की सजा का प्रावधान है। - रवि शर्मा, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी
मदनापुर क्षेत्र के गांव बरुआ पट्टी सनायक मेंं बंद पड़ा नकली काली मिर्च का कारखाना। संवाद