खुटार। नगर पंचायत के तालाबों पर अवैध कब्जों की जांच के लिए एसडीएम ने जनवरी में एक टीम का गठन किया था। दस माह में टीम न तो जांच कर सकी और न ही रिपोर्ट देने की जरूरत समझी गई। खास बात ये है कि टीम बनाने के बाद एसडीएम ने भी रिपोर्ट न मिलने पर कर्मियों से जवाब तलब नहीं किया।
नगर पंचायत क्षेत्र में 33 तालाब राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं। इसमें 16 तालाबों पर पूरी तरह से अवैध कब्जा कर नामोनिशान मिटा दिया गया है, शेष 17 तालाबों की आधे से अधिक भूमि कब्जाई जा चुकी है। जनवरी में मामला सामने आया था। शिकायत के बाद एसडीएम ने टीम का गठन किया। टीम से तालाबों की पैमाइश कर अवैध कब्जेदारों को चिह्नित करने और रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था, लेकिन दस माह बीत जाने के बाद भी टीम ने रिपोर्ट देना तो दूर तालाबों की पैमाइश और जांच की जरूरत तक नहीं समझी है।
नगर पंचायत प्रशासन के साथ ही राजस्व कर्मी भी अवैध कब्जों के लिए कम जिम्मेदार नहीं हैं। तालाबों को पाटा जा रहा है, लेकिन लेखपाल ने सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जों की जानकारी अधिकारियों को देना जरूरी नहीं समझा। अब भी अवैध कब्जों का खेल चल रहा है, लेकिन लेखपाल, कानूनगो से लेकर नायब तहसीलदार तक चुप्पी साधे हैं। राजस्व कर्मियों के भी मौन रहने से तमाम सवाल उठ रहे हैं।
कुंडा तालाब में बहाई जा रही गंदगी
नगर के मुख्य बाजार के पीछे कुंडा तालाब की कभी बड़ी महत्ता थी। यहां पूजा-पाठ सहित शादी आदि के कई कार्यक्रम संपन्न होते थे। अब तालाब के आसपास कई लोगों ने शौचालयों के टैंक न बनवाकर गंदगी के पाइप सीधे तालाब में खोल रखे हैं। इससे कुंडा तालाब का पानी जहर बन गया है। गाद और गंदगी के चलते तालाब काफी उथला हो गया है और इसमें जलीय जंतु समाप्त हो गए हैं। जलकुंभी के कारण धीरे-धीरे बचा तालाब भी सिमटता जा रहा है। पौने तीन एकड़ रकबे वाला यह तालाब अब कुछ ही जगह में रह गया है।
जनवरी में शिकायत मिलने पर राजस्व टीम का गठन किया गया था, लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं मिली है। नायब तहसीलदार के नेतृत्व में टीम का गठन कर तालाबों की पैमाइश कराई जाएगी और अवैध कब्जे चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।
संजय पांडे, एसडीएम, पुवायां