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Shahjahanpur News: स्कूल के नाम पर सिर्फ चॉक से लिखा नाम, खुले आसमान के नीचे हो रही पढ़ाई

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शाहजहांपुर। नगर में संचालित 47 परिषदीय विद्यालयों में दो स्कूलों की हालत काफी खस्ताहाल है। किराये के भवन में संचालित पांच प्राथमिक विद्यालय में भारद्वाजी स्कूल की हालत काफी खराब है। स्कूल के नाम पर सिर्फ चॉक से स्कूल का नाम लिखा है। छत तक गायब है। बच्चों को खुले आसमान के नीचे बैठाया जाता है। छात्र-छात्राओं के ऊपर जहां विभाग लाखों रुपये खर्च कर रहा है, वहीं इन भवनों का किराया महज 35 से 65 रुपये के बीच है।
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शहरी क्षेत्र में पहले 51 प्राइमरी और आठ जूनियर स्कूलों का संचालन होता था। एक ही परिसर में संचालित विद्यालयों को संविलियन करने की प्रक्रिया शुरू हुई तो यह संख्या 47 पर सिमट गई। नगर के इन स्कूलों में पांच विद्यालय किराये के भवनों में चल रहे हैं। सबसे ज्यादा हालत खराब प्राथमिक विद्यालय भारद्वाजी की है। यह किराये के भवन में संचालित होने से सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। दो कमरों के भवन के बरामदे की छत गायब है। दीवारें भी जर्जर हालत में है। स्कूल का बोर्ड तक नहीं लगा है। कमरों में लगे दरवाजे पर चॉक से प्राथमिक विद्यालय का नाम अवश्य लिखा मिला। बृहस्पतिवार को नगर शिक्षा अधिकारी द्वारा नेट की परीक्षा के पेपर वितरण कराने के लिए शिक्षामित्र राकेश कुमार को अपने दफ्तर बुला लिया था। अकेले शिक्षामित्र होने के कारण स्कूल की छुट्टी कर दी गई। यहां पर छात्र 25 से 30 ही बताये गये हैं। शिक्षामित्र के मुताबिक, स्कूल भवन जर्जर होने के कारण बच्चों को अंदर नहीं बैठाते हैं। बारिश में बच्चों को बैठाने के लिए व्यवस्था न होने पर छुट्टी करनी पड़ती है।
अलीजई में टिन शेड के नीचे पढ़ाई, हालत खराब
नेशनल गर्ल्स इंटर कॉलेज के आगे काले फाटक के नाम से मशहूर प्राथमिक विद्यालय अलीजई भी किराये के भवन में चल रहा है। भवन के अंदर दो टिन शेड हैं। एक टिन शेड में दफ्तर और शिक्षक बैठते हैं। जबकि दूसरे शेड में तीन ब्लैक बोर्ड लगाकर पढ़ाई कराई जाती है। एक शिक्षामित्र सुबोध वर्मा ही इंचार्ज हैं। परिसर में झाड़ियां हैं। उसमें गिट्टी पड़ी है। जर्जर भवन होने के कारण बच्चों तक के लिए खतरा रहता है। बारिश होने पर बच्चों की छुट्टी करना पड़ती है। यहां 114 छात्र है।
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पुलिस लाइन का विद्यालय भी जर्जर
प्राथमिक विद्यालय पुलिस लाइन की स्थिति भी काफी ज्यादा खराब है। पुलिसकर्मियों के क्वार्टर जहां चमक रहे हैं, वहीं बगल के प्राथमिक विद्यालय का सिर्फ ऊपर से रंग-रोगन कर व्यवस्था को बेहतर कराने दिखाने का प्रयास किया जा रहा। स्कूल के बगल में करीब दो साल पहले शिक्षक का भवन गिर गया था। उसे सही कराने के लिए विभाग ने अभी तक प्रयास शुरू नहीं किए हैं। इसके अलावा अंदर जहां बच्चे बैठते हैं, वहीं पर खाना बनाया जाता है। दीवारों पर फर्श चटक चुका है। यहां पर स्कूल का अपना भवन है।
हाथीथान के स्कूल भी जर्जर
नगर के प्राथमिक स्कूल हाथीथान प्रथम व हाथीथान द्वितीय का भवन भी काफी जर्जर है। यहां पर बच्चों के बैठने का पर्याप्त इंतजाम नहीं है। दीवारों के जर्जर होने खतरा मंडराता रहता है। किराये पर संचालित भवन को दूसरी जगह पर शिफ्ट करने के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
एक भवन में चल रहे दो विद्यालय
शहरी क्षेत्र में किराये के भवनों में चल रहे कई विद्यालयों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कर दिया गया। रंगीन चौपाल को लाल इमली चौराहा स्थित भवन में शिफ्ट किया गया।
शिक्षकों की भारी कमी
स्कूल में शिक्षकों की काफी ज्यादा कमी है। नगर के 47 स्कूलों के लिए मात्र 37 शिक्षक व 32 शिक्षामित्र हैं। कुछ जगह पर शिक्षकों के नहीं होने पर अटैचमेंट कर व्यवस्था संभाली जा रही है।
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नगर में पांच स्कूल किराये के भवन में चलाए जा रहे हैं। उन्हें शिफ्ट करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
सुरेंद्र सिंह रावत, बीएसए
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