शाहजहांपुर। अखिल भारतीय ईंट निर्माता एसोसिएशन के आह्वान पर जीएसटी में वृद्धि सहित अन्य समस्याओं के विरोध में जिले के ईंट भट्ठा मालिकों ने सोमवार से काम बंद हड़ताल शुरू कर दी। भट्ठों पर ईंटों की पथाई, पकाई और बिक्री का काम ठप हो गया। ईंट भट्ठों पर सन्नाटा पसरा रहा।
शाहजहांपुर ईंट निर्माता कल्याण समिति ने केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर जनपद के सभी भट्ठों पर 17 सितंबर तक हड़ताल प्रभावी रखने का निर्णय किया है। जिले में करीब 250 ईंट भट्ठा हैं, जिनमें से 240 चालू हालत में हैं, लेकिन उनके मालिकों को कोयला संकट समेत कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। ईंट निर्माता एसोसिएशन ने करीब एक माह पहले ज्ञापन देकर अपनी कई मांगें रखी थीं। इनमें जीएसटी दर में वृद्घि वापस लेने, भट्ठों के लिए नियंत्रित दर पर कोयला सुलभ कराने, जेसीबी से मिट्टी खनन की छूट दिए जाने, भट्ठा श्रमिकों को दमा व कैंसर से बचाने के लिए फ्लाई एश से ईंट निर्माण पर रोक लगाने आदि मांगें शामिल थीं। साथ ही इन मांगों का निस्तारण नहीं होने पर अगले पथाई सीजन (दिवाली के बाद) में नई ईंट के निर्माण पर रोक लगाने की चेतावनी दी थी।
समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो पूर्व घोषणा के अनुरूप जिले के भट्ठा मालिकों ने हड़ताल शुरू कर दी। कई भट्ठों का जायजा लेने पर वहां ईंट की ढुलाई करने वाले श्रमिक खाली बैठे दिखे। ओम प्रकाश खंडेलवाल के मोहम्मदी मार्ग स्थित भट्ठा पर मिले मुनीम सुरेश चंद्र ने बताया कि कई ग्राहक आने पर भी ईंट की बिक्री नहीं की गई।
ईंट भट्ठा उद्योग श्रमिकों को न सिर्फ स्थानीय स्तर पर रोजगार देता है, उनका अन्य जनपदों और राज्यों में पलायन रोकता है। हर ईंट भट्ठा से कम से कम 100 परिवारों की आजीविका चल रही है। इसके बावजूद सरकार द्वारा भट्ठा संचालकों की समस्याओं को उपेक्षित करना निराशाजनक है। ईंट उत्पादन और बिक्री थमने से विभिन्न शुल्क मद में प्राप्त होने वाले राजस्व में कमी आएगी। सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो हड़ताल लंबी खिंच सकती है। -राकेश कपूर, जिलाध्यक्ष, शाहजहांपुर ईंट निर्माता कल्याण समिति