शाहजहांपुर। कभी शाहजहांपुर में भी स्टीम ट्रॉम चलती थी। इसकी शुरुआत अप्रैल 1890 से हुई थी। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इसे बंद कर दिया गया। इसके बाद अंग्रेजों ने रेलवे लाइन उखाड़कर बेच दी थी।
एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. विकास खुराना ने बताया कि 19वीं शताब्दी में जिले में रेल का विस्तार किया गया। सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण यह रेलवे लाइन नेपाल सीमा के साथ-साथ बिहार तथा आगे बंगाल तक ले जाई गई। उत्तरी सेहरामऊ तथा जोगराजपुरा इसके प्रमुख स्टेशन थे। यह 17 मील लंबी रेलवे लाइन अप्रैल 1890 को खुली। इससे एक ट्राॅम लाइन काटकर अवध रुहेलखंड रेलवे से जोड़ी गई थी। इसे पुवायां स्टीम ट्राम अथवा पुवायां लाइट रेलवे के नाम से जाना जाता था। इसे बिछाने वाले इंजीनियर एरिक गैजेड थे।
1904 में इस लाइन को मैलानी तक बढ़ा दिया गया। अब लंबाई 34 मील हो गई थी। इस लाइन के बिछाने का मुख्य उद्देश्य केरू कंपनी को उत्तर के जंगलों की लकड़ी उपलब्ध करवाना था। इस लाइन में शहर के सात व्यापारियों ने चार लाख रुपये भी दिए थे, जिसके बाद कुछ सवारी डिब्बे भी इसमें लगाए गए। पुवायां में स्टीम ट्राम खन्नौत, भैंसी और गोमती नदी को सड़क के पुल से ही पार करती थी। प्रथम विश्व युद्ध के दिनों में अंग्रेजों ने यह लाइन उखाड़कर बुशाइर रेलवेज को 40 हजार रुपये में बेच दी। वर्ष 1921 में फिर से एक बार इस लाइन को बिछाने के प्रयास हुए, लेकिन आर्थिक लाभ न होते देखकर इसे त्याग दिया गया।
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रेल की महायोजना का हिस्सा थी कुमायूं रुहेलखंड रेलवे लाइन
शाहजहांपुर में रेल का विस्तार तीन चरणों में पूरा हुआ। मुख्य लाइन जो जिले के पूरब से प्रवेश करती थी, उसे अवध-रुहेलखंड रेलवे कंपनी ने बिछवाया था। कंपनी का पुनर्गठन 1872 में हुआ था। एक मार्च 1873 को यह लाइन खोल दी गई। यह लाइन खन्नौत तथा गर्रा को लोहे के पुल से काटती थी तथा पश्चिम दिशा में आगे बढ़ती हुई जिले को बहगुल के पुल से छोड़ देती थी।
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लंदन की लाइब्रेरी में सुरक्षित हैं फोटोग्राफ
डॉ. विकास खुराना ने बताया कि पुवायां स्टीम ट्रॉम के अनेक फोटोग्राफ लंदन लाइब्रेरी में सर एडवर्ड बोस्क एल्बम में सुरक्षित हैं। इसमें से एक फोटो हाल ही में शहर के रहने वाले तथा लंदन में सॉफ्टवेयर इंजीनियर मयंक गुप्ता के प्रयासों से प्राप्त किया गया है। यह शाहजहांपुर की एक धरोहर है।
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पुवायां तहसील के लिए ट्राॅम बहुत ही लाभकारी सिद्ध हुई। इससे पहले घोड़ों और बैलगाड़ियों पर व्यापारी पुवायां आते-जाते थे। यह ट्रॉम लाइन दो फीट छह इंच की थी। नदियों को सड़क के पुल से ही पार करती थी। ब्रिटिशकालीन शाहजहांपुर विश्व के उन चुनिंदा शहरों में शामिल था, जिसकी अपनी ट्रॉम थी। पुवायां रेल के दोबारा बिछाए जाने पर विचार होना चाहिए।
-डॉ. विकास खुराना, इतिहास विभागाध्यक्ष, एसएस कॉलेज।
पुवायां स्टीम ट्रॉम का फाइल फोटो। स्रोत : इतिहासकार विकास खुराना