रामबली मूलरूप से हरदोई जिले के थाना लुनार के गांव गंगा सिंह पुरवा के रहने वाले थे। वह खन्नौत नदी के किनारे स्थित मोक्षधाम में पत्नी रामरोशनी के साथ रहते थे। वह मोक्षधाम के केयर टेकर भी थे। रामबली पिछले 20 साल से सांपों को पकड़ने का काम करते आ रहे थे। गुरुवार की रात करीब साढ़े 12 बजे मोहल्ला इंदिरा नगर कॉलोनी के दो लोग उन्हें सांप पकड़ने के लिए बुलाने आए थे।
रामबली ने सांप को पकड़ लिया। बोरी में बंद करने के दौरान हाथ की अंगुली में सांप ने डस लिया। बावजूद इसके वह सांप पकड़कर मोक्षधाम पर ले आए। बोरी से सांप को निकालकर डिब्बे में बंद कर दिया। जहर का असर महसूस होने पर उन्होंने अपने मौसेरे भाई नरेंद्र को फोन किया।
नरेंद्र गर्रा स्थित अंत्येष्टि स्थल पर रहता है। रामबली ने उसे सांप से डसने की बात बताते हुए बिरवा तैयार करने की बात कही थी। इसके बाद वह नरेंद्र के पास पहुंच गया। बिरवा पीने के बाद भी हालत में सुधार न होने पर नरेंद्र उन्हें राजकीय मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। जहां रात करीब ढाई बजे उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
सूचना पर रात में ही रामबली के बड़े भाई राम सिंह व रामनरेश अस्पताल आ गए। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया। रामबली की एक बेटी की शादी हो चुकी है। तीन बेटियां अविवाहित हैं।
आसपास के जिलों में सांप पकड़ने जाते थे रामबली
रामबली को बचपन से ही सांप पकड़ने का शौक था। बताते हैं कि वह सांप पकड़ने की कला कोलकाता से सीखकर आए थे। वह जिले के अलावा पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, हरदोई, सीतापुर व बरेली तक सांप पकड़ने के लिए जाते थे।