बारिश से तालाब में बदले कई निचले इलाके, कई घरों में भरा पानी
तीन दिन में हो चुकी है 94 मिमी बारिश, दो दिन बाद राहत की उम्मीद
शाहजहांपुर। बंगाल की खाड़ी में उठे नोरू चक्रवात के असर के चलते मानसून ने रविवार को भी अपने तेवर तीखे बनाए रखे। आधी रात से सुबह तक 60 मिमी झमाझम बरसात हुई। निचले इलाकों की सड़कें जलमग्न होकर तालाबों में बदल गईं। सीवर लाइन के लिए खोदी गई सड़कों की मिट्टी से कीचड़ और फिसलन पैदा हो गई। दोपहर को थोड़ी देर बारिश रुकी, लेकिन शाम चार बजे से फिर बूंदाबांदी शुरू हो गई।
मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, बीते तीन दिन में जनपद में 94 मिमी बारिश हो चुकी है। बारिश अभी दो दिन और जारी रहने का अनुमान है। शनिवार रात 11 बजे से बूंदाबांदी शुरू हुई और वातावरण में आर्द्रता शत-प्रतिशत हो जाने से हवा में ठंडक बढ़ गई। न्यूनतम तापमान लगातार तीसरे दिन तीन डिग्री घटकर 21 डिग्री सेल्सियस हो गया। सुबह आठ बजे तक 53 मिमी पानी बरस चुका था। बाद में दोपहर तक सात मिमी पानी और गिरा।
गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार, बैरोमीटर सूचकांक अभी सामान्य से औसतन 20 अंक नीचे है। उन्होंने बताया कि वायुदाब सामान्य से कम होने के कारण हवा की गति मध्यम रहने के साथ सोमवार को भी दिन भर बादल छाए रहेंगे और बारिश होने की संभावना है।
अक्तूबर में सामान्य से छह गुना अधिक बरस चुका है पानी
अक्तूबर में सामान्य वर्षा मानक सिर्फ 17.2 मिमी है। माह खत्म होने में तीन सप्ताह बाकी हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी एवं वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी का कहना है कि मौसम साफ नहीं होने की दशा में अब जितनी ज्यादा बारिश होगी, उसी अनुपात में फसली नुकसान बढ़ेगा।
हवा की गति बढ़ने से धान को होगी व्यापक क्षति
जिले के 2.67 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में खरीफ फसलें बोई गई हैं। इसमें 2.40 लाख हेक्टेयर रकबा धान की विभिन्न किस्मों से घिरा है। उप कृषि निदेशक धीरेंद्र सिंह का कहना है कि हवा की गति सीमित होने के कारण अभी धान की फसल को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है, जबकि गन्ना के लिए बारिश लाभकारी है, बशर्ते हवा की गति सीमित रहे। लगातार वर्षा से तिल की फसल भी खराब हो रही है। उप कृषि निदेशक के अनुसार किसान शकरकंद और मूंगफली के खेतों से बारिश का पानी निकालते रहें तो यह फसलें सुरक्षित बनी रहेंगी।
बारिश से कई जगह गिरी धान की फसल डूबी
पुवायां/बंडा/खुटार। पुवायां क्षेत्र में गोमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। उत्तराखंड में ज्यादा बारिश हुई और बांधों से पानी छोड़ा गया तो स्थिति और भी खराब हो सकती है। कई जगहों पर धान गिर गया है तो कहीं पानी भरने से काला पड़ने लगा है। तिल्ली की फसल में भी नुकसान हुआ है। हवा चलने से गन्ना भी गिर गया है। एसडीएम हिमांशु उपाध्याय ने रविवार को पुवायां कस्बे में जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण किया और पालिकाकर्मियों को जरूरी निर्देश दिए।
बंडा के गांव बंडी निवासी विजय कुमार ने बताया कि उन्होंने दस एकड़ में धान लगाए थे। फसल पककर तैयार हुआ तो बारिश शुरू हो गई। इससे धान गिर गया है और उसमें पानी भर गया है। गांव धर्मापुर निवासी आशीष कुमार ने बताया बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। बंडा निवासी हरपाल ने बताया है बारिश से फसलों में भारी नुकसान हुआ है। प्रशासन को सर्वे कराना चाहिए और मुआवजा दिलाना चाहिए।
बंडा से गांव धर्मापुर जाने वाला रोड पानी के बहाव से कट गया है, जिससे धर्मापुर, पसियापुर, बाबा चरनदास कॉलोनी और ब्लॉक कार्यालय जाने वाले लोगों को पानी से गुजरकर जाना पड़ रहा है। बारिश के कारण मोहल्ला पटेल नगर में पानी लोगों के घरों तक भर गया है।