शाहजहांपुर। स्क्रैप नीति लागू होने के 16 महीने बीतने के बाद भी स्क्रैप सेंटर नहीं खुल सका है। जिले से एकमात्र आवेदन आया था, लेकिन वह भी फाइलों में अटककर रह गया। इस कारण निजी और व्यावसायिक करीब 60 हजार वाहन कबाड़ हो गए।
एक अप्रैल 2023 में देश में स्क्रैप नीति लागू की गई थी। इसके तहत प्रत्येक जिले में स्क्रैप सेंटर खोलकर वाहन मालिकों को फायदा पहुंचाना था। अधिकारियों की मानें तो स्क्रैप सेंटर में पुराना वाहन बेचने पर नए वाहन के पंजीकरण में लगने वाले 10 से 15 प्रतिशत तक की छूट दी जानी है। नीति लागू होने के बाद जिले के एक बड़े कारोबारी ने स्क्रैप सेंटर खोलने के लिए आवेदन किया था। उनका आवेदन पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।
ऐसे में लोग अब भी अपने पुराने वाहन कबाड़ियों के पास ही बेच रहे हैं। एआरटीओ कार्यालय के अनुसार, जिले में करीब 60 हजार वाहन अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। प्रदूषण और हादसे के डर से नियम के तहत ये सड़क पर नहीं चलने चाहिए।
पंजीकरण निरस्त कराने की यह है प्रक्रिया
-स्कैप सेंटर नहीं होने के चलते वाहन चालक कबाड़ियों को अपनी गाड़ी बेचते हैं। गाड़ी का एक टुकड़ा एआरटीओ कार्यालय में दिखाकर अपना पंजीकरण निरस्त करा लेते हैं। ऐसे में वाहन मालिकों को नई गाड़ी के रजिस्ट्रेशन में मिलने वाली छूट नहीं मिल पा रही है।
स्कैप सेंटर की मंजूरी मुख्यालय से मिलनी है। एक आवेदन पूर्व में किया गया था। उनके अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति आगे नहीं आया है। सेंटर बनने से वाहन मालिकों को काफी फायदा होगा।
शांतिभूषण पांडेय, एआरटीओ प्रवर्तन