शाहजहांपुर में सावन माह की पूर्व संध्या पर बिजली की झालरों से सजाया श्रीबाबा विश्वनाथ मंदिर
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शाहजहांपुर। भोलेनाथ की आराधना श्रावण मास बृहस्पतिवार से शुरू हो रहा है। श्रावण मास में शिव भक्त मंदिरों में पहुंचकर शिवलिंग का अभिषेक करेंगे। इसके साथ ही रुद्राभिषेक, महा मृत्युंजय मंत्र का जाप आदि अनुष्ठान भी होंगे। इसको लेकर बुधवार को शिव मंदिरों में तैयारियां की गई। शिव मंदिरों को फूलों और बिजली की झालरों से सजाया गया। वहीं, कांवड़ बनना भी शुरू हो गए हैं। हालांकि अधिकांश कांवड़िये फर्रुखाबाद के घटिया घाट पर स्नान और गंगा जल लेने के दौरान ही कांवड़ लेते हैं।
श्रावण मास में नगर व आसपास के ग्रामीण अंचलों के प्राचीन शिव मंदिरों समेत गली मोहल्लों में स्थित शिव मंदिरों में कांवड़ियों और शिव भक्तों द्वारा महादेव का जलाभिषेक किया जाएगा। इसको लेकर बृहस्पतिवार को प्रमुख शिव मंदिरों में तैयारियां की गईं। नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा ने भी व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधीनस्थों व मंदिर कमेटी को आवश्यक निर्देश दिए। शहर के बाबा विश्वनाथ मंदिर, बाबा बनखंडी नाथ मंदिर, बाबा चौकसी नाथ मंदिर, संकट मोचन मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर लाल तेली बजरिया, बाबा त्रिलोकी नाथ मंदिर पैना में शिवभक्तों व कांवड़ियों की भीड़ उमड़ती है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित प्राचीन शिव मंदिरों में श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को मेला भी लगता है।
700 से लेकर पांच हजार रुपये तक की कांवड़
- शहर के मोहल्ला हुसैनपुरा निवासी रतीराम व जयराम का परिवार कांवड़ बनाने का काम करता है। कोरोना संक्रमण काल में यह काम बंद था लेकिन इस बार कांवड़ बनाई जा रही हैं। कांवड़ के लिए बांस की छंटाई, कपड़ा की कटाई के साथ डोल सजाए जा रहे हैं। बताते हैं कि 700 रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक कांवड़ बनाने में खर्च आता है। 1500 से तीन हजार तक की कांवड़ अधिकतर लोग बनवाते हैं। इस बार अच्छी कमाई की उम्मीद है।