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गंगा और रामगंगा में उफान से तटीय गांवों की ओर फिर बढ़ा पानी

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शाहजहांपुर। लगातार हो रही वर्षा से नदियों में उफान और बैराजों से अतिरिक्त पानी की निकासी ने जिले से होकर बहने वाली नदियों में उफान ला दिया है। मंगलवार को भी उफान बना रहा। शहर के पास गर्रा और खन्नौत नदियों में पानी बढ़ने से तिलहर और सदर तहसील के कई गांवों पर बाढ़ का खतरा बना है।
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कलान के भैंसार बांध पर गंगा दस सेमी बढ़कर 142.90 मीटर पर पहुंच गई जबकि बरेली के चौबारी घाट पर रामगंगा का जलस्तर 49 सेमी बढ़कर 169.22 मीटर हो गया है। डीएम उमेश प्रताप सिंह ने मंगलवार को गर्रा नदी स्थित अजीजगंज तथा ककरा को जोड़ने वाले पुल से गर्रा में बढ़े जलस्तर का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राहत एवं बचाव की सभी व्यवस्था पूरी रखी जाए। रामगंगा के जलस्तर में हुई वृद्धि का असर जिले में जैतीपुर और परौर से लेकर अल्हागंज क्षेत्र तक दिख रहा है।
गंगा के तटवर्ती मिर्जापुर क्षेत्र का गांव आजाद नगर फिर बाढ़ से चौतरफा घिर गया है। ग्रामीण आवागमन के लिए नाव का सहारा ले रहे हैं। मजरा इस्लामनगर का दक्षिणी भाग पूरी तरह जलमग्न हो गया है। इशहाक, नाजिम, काले, नसरुद्दीन आदि का कहना है कि बारिश और बाढ़ के पानी से घर में रखा राशन, कपड़ा, बिस्तर सब भीग गया है। भोजन-पानी का संकट है। आजाद नगर, इस्लामनगर, मस्जिद नगला, कमथरी, चितार आदि गांवों के अधिकांश युवा बाहर मजदूरी करते हैं। गांव में अधिकतर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे हैं। प्रशासन से भी कोई मदद नहीं मिलती। वहीं रामगंगा भी तेजी से बढ़ रही है। कोलाघाट में लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्माणाधीन पैंटून पुल भी हटा लिया गया है। पैंटून पुल का निर्माण करवा रहे कर्मचारी जलालुद्दीन ने बताया कि पैंटून पुल के ऊपर अब तक लगाए गए स्लीपर बाढ़ में बह जाने के खतरे को देखते हुए उच्चाधिकारियों के निर्देश पर हटा लिए गए हैं। गंगा में बाढ़ से जलालाबाद-ढाई मार्ग पर चौरा गांव के पास पानी आ गया है।
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गंगा के जलस्तर में अब और वृद्धि होने की दशा में जलालाबाद-एटा स्टेट हाईवे पर आवागमन में एक बार फिर रुकावट पड़ने की आशंका पैदा हो गई है। सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष से बताया गया कि नरौरा बैराज से पानी का बहाव एक हजार क्यूसेक बढ़कर 50349 क्यूसेक हे गया है। इसलिए गंगा के जलस्तर में अगले 24 घंटे तक कमी आने की कोई उम्मीद है। चूंकि, हरेली, खो, किच्छा, रामनगर आदि बैराजों से निकल रहे पानी की मात्रा करीब 21 हजार क्यूसेक बढ़कर एक लाख 18 हजार 963 क्यूसेक हो गई है। इसलिए बुधवार को रामगंगा में उफान बढ़ना तय है।
सुरक्षित स्थानों पर भेजे रामेश्वरगंज गौंटिया के बाशिंदे
उखरी (खुदागंज)। गर्रा नदी में अत्यधिक पानी आने से क्षेत्र के कई गांव बाढ़ की चपेट में है। जहां एक ओर किसानों की फसलें जलमग्न हैं, वहीं रास्तों पर जलभराव के चलते लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के गांव रामेश्वरगंज गौंटिया में बढ़ रहे जलभराव को देखते हुए पुलिस ने ग्रामीणों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर रहने की हिदायत दी है। इसी तरह भुंडी, कंधरापुर, मीरपुर, रामपुर जयचंद, सथरापुर आदि गांव बाढ़ की चपेट में हैं। भुंडी गांव के निकट आने-जाने वाले मार्ग पर बनी पुलिया भी क्षतिग्रस्त हो गई है।
परौर क्षेत्र के लोगों पर बारिश के साथ बाढ़ की दोहरी मार
परौर। एक ओर रामगंगा की बाढ़ से कीमती कृषि जमीनें कटकर नदी में समा रही हैं, वहीं भारी वर्षा से धान, बाजरा की फसलें खेतों में गिरकर अंकुरित होने लगी हैं। रामगंगा परौर के मजरा नारायणनगर पश्चिमी, बिचपुरी, मोहनपुर, मंझा आदि गांवों को निशाना बनाकर भूमि कटान कर रही है।
गोमती का जलस्तर और बढ़ा, डूब गई धान व गन्ने की फसल
पुवायां। लगातार हो रही बारिश और नानक सागर बांध से पानी छोड़ने के कारण गोमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। पानी बढ़ने की गति बरकरार रही तो हाईवे के ऊपर से पानी की धार चल सकती है।
चार दिन से गोमती के जलस्तर में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। गोमती के किनारों तक लोगों ने खेती करना शुरू कर दिया है और नदी नाले का रूप लेती जा रही है। अब पानी बढ़ने से नदी के आसपास एक किमी तक खड़ी धान, तिली की फसल पूरी तरह से डूब गई है। इससे फसल के पूरी तरह नष्ट होने की आशंका है। वहीं गन्ने की फसल भी डूब गई है, यदि पानी उतर गया तो गन्ने में कम नुकसान होगा।
पुवायां में मंगलवार सुबह से दोपहर तक बारिश बंद रही लेकिन शाम पांच बजे तक बारिश होने से किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। किसान अब बारिश बंद होने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। रामचंद्र, विनोद कुमार, रामनरेश, रहीसपाल, राजेंद्र आदि किसानों ने बताया कि जो धान गिर गया है वह काला पड़ चुका है, इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
मछली पकड़ने को लगी भीड़
पुवायां। गोमती नदी में पानी बढ़ने से मंगलवार दिन भर मछली पकड़ने वालों की भीड़ लगी रही। लोगों ने बताया कि नदी के आसपास क्षेत्र में लोगों ने तालाबों में मछली पालन कर रखा था। बाढ़ के कारण तालाबों की मछली नदी में आ गई हैं। सोमवार और मंगलवार को लोग दिन भर मछली पकड़ते रहे।
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