शाहजहांपुर। जिले से होकर बहने वाली गंगा, रामगंगा और उनकी सहायक नदियों में सोमवार को तीसरे दिन भी उफान जारी रहा। हालांकि, कलान के भैंसार बांध पर बीते 24 घंटे में गंगा का जलस्तर सिर्फ एक सेमी बढ़कर 141.08 मीटर हुआ है, लेकिन सुबह नरौरा बैराज से निकले एक लाख 28 हजार 716 क्यूसेक पानी से गंगा में उफान बढ़ने के आसार हैं। इससे तटीय गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है।
विभिन्न बैराजों से रामगंगा में पानी की निकासी करीब 11 हजार क्यूसेक कम की गई। इससे बरेली के चौबारी घाट पर रामगंगा का जलस्तर दो मीटर कम होकर 159.30 मीटर हो गया है, लेकिन उधर से सारा पानी सिमटकर यहां आने से जैतीपुर ब्लॉक से लेकर जलालाबाद, मिर्जापुर व अल्हागंज तक रामगंगा में उफान जारी है।
शहर के समीप गर्रा अब रौद्र रूप लेने लगी है। बीते दिनों की तुलना में गर्रा का जलस्तर 1.15 मीटर बढ़कर 147.10 मीटर हो गया। खन्नौत भी 45 सेमी बढ़कर 145.30 मीटर पर बह रही है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष को सोमवार सुबह विभिन्न बैराजों से मिली सूचनाओं के अनुसार नरौरा से गंगा में पानी की निकासी 1.19 लाख क्यूसेक से ज्यादा बढ़ाई गई है। अतिरिक्त पानी की यह खेप कछला घाट (बदायूं) होकर मंगलवार सुबह तक यहां पहुंच जाएगी।
ऐसे में जलालाबाद के ढाई घाट से लेकर मिर्जापुर ब्लॉक के उन तटीय गांवों तक पानी पहुंच सकता है, जहां गत वर्ष बाढ़ से टापू जैसे हालात बन गए थे। हालांकि, अभी तक प्रशासन नदियों के किनारे आबादी क्षेत्र को बाढ़ से पूरी तरह सुुरक्षित मान रहा है। इसलिए वहां की चौकियों पर अभी तक न तो राहत कार्य शुरू हुए और न ही ग्रामीणों को रसद आदि उपलब्ध कराई गई है।
बीते 48 घंटे में गर्रा 2.70 मीटर और खन्नौत एक मीटर बढ़ चुकी है। नियंत्रण कक्ष से बताया गया कि सोमवार सुबह ड्यूनी डैम से गर्रा में 45460 क्यूसेक पानी की निकासी की गई। सिंचाई विभाग के अनुुसार इससे पहले वर्ष 2018 में 14 अगस्त को ड्यूनी से गर्रा में हाई फ्लड लेवल तक 60000 क्यूसेक पानी की निकासी हो चुकी है। इससे खुदागंज और ददरौल ब्लॉक से लेकर शहर के कई मोहल्लों में बाढ़ की वजह बन सकता है।
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मोहनपुर से 100 मीटर के फासले पर पहुंची रामगंगा
परौर। रामगंगा में उफान बढ़ जाने से नदी से तटीय गांवों का फासला कम हो रहा है। मोहनपुर से आमतौर पर लगभग एक किमी दूर बहने वाली रामगंगा की गांव से दूरी घटकर 100 मीटर रह गई है। मोहनपुर में कटान होने पर कस्बे के मोहल्ला बाजार समेत बिचपुरी और नारायण नगला को भी बाढ़ अपनी चपेट में ले सकती है। करीब डेढ़ दशक पहले बाढ़ से इन गांवों में भीषण कटान हुआ था। गांवों को नदी के कटान से बचाने के लिए नारायणनगर पश्चिम से लेकर मोहनपुर तक वर्ष 2020-21 में बनवाए गए तटबंध देखरेख में कमी के कारण अब मरम्मत मांग रहे हैं, लेकिन नदी में उठ रहीं लहरों के कारण बालू की बोरियांं वायर क्रेट में डलवाने के अतिरिक्त गांवों को बाढ़ से बचाने का अन्य कोई उपाय नहीं है। ऐसा नहीं किए जाने पर कई गावों के स्कूल भवन भी मिट जाएंगे। संवाद