पिछले साल ढहा था कोलाघाट का पुल
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वर्ष 2008 में 43 करोड़ की लागत से करीब 1,800 मीटर लंबे कोलाघाट पुल के निर्माण के दौरान मानकों की अनदेखी की गई थी। इसी वजह से पिछले साल 29 नवंबर को रामगंगा नदी पर बने पुल का एक पिलर धंस जाने से पुल टूटकर तीन हिस्सों में बंट गया था।
उप्र राज्य सेतु निगम के महाप्रबंधक/मुख्य परियोजना प्रबंधक संदीप गुप्ता ने सोमवार को हथौड़ा रेलवे ओवरब्रिज के नीचे निगम के खंडीय कार्यालय में पत्रकार वार्ता में स्वीकार किया कि निर्माण के समय कुछ चीजों की गुणवत्ता और मानकों का ध्यान नहीं रखे जाने से पुल ढहा था।
उन्होंने बताया कि सेतु निगम के प्रबंध निदेशक के आदेश पर उत्तरदायी पाए गए निगम के तत्कालीन महाप्रबंधक से लेकर विभिन्न विभागों के अवर अभियंता स्तर के 13 अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, जिसके बाद कार्रवाई होगी।