- व्यास विजय कौशल महाराज ने श्रीराम कथा के प्रसंग को आगे बढ़ाया
- मुमुक्षु महोत्सव में बृहस्पतिवार की सुबह प्रार्थना और श्री रुद्रमहायज्ञ हुआ
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। मुमुक्षु महोत्सव में बृहस्पतिवार की सुबह प्रार्थना और श्री रुद्रमहायज्ञ हुआ। इसके बाद व्यास विजय कौशल महाराज ने श्रीराम कथा के प्रसंग को आगे बढ़ाया और महाराज दशरथ के पंचतत्व में विलीन होने तथा अयोध्यावासियों के चित्रकूट की ओर प्रस्थान करने का प्रसंग सुनाया।
व्यास ने कहा कि भरत के आने के बाद महाराज दशरथ का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। पूरी अयोध्या सूनी, शोकाकुल और उदासी में डूब गई। गुरु वशिष्ठ ने भरत को पूरा वृत्तांत सुनाया और शोक छोड़कर पिता की आज्ञा का पालन करते हुए राज्य संभालने को कहा। इसके साथ ही माता कौशल्या ने भरत से कहा कि सत्ता को पथ्य के रूप में ही स्वीकार कर लो, लेकिन भरत ने कहा कि हे माता! पथ्य तो रोग दूर होने पर दिया जाता है, जबकि अयोध्या तो अभी रोगमय है। भरत ने कहा कि जब तक मैं प्रभु के चरणों में बैठकर रो नहीं लूंगा, तब तक मेरे चित्त की जलन शांत नहीं होगी।
अगले दिन सरयू के किनारे पालकी, रथ व घोड़े एकत्र हो गए और चित्रकूट की ओर काफिला प्रस्थान कर गया। श्रीराम के पास पहुंचकर भरत ने उनसे अयोध्या वापस चलने का अनुरोध किया। इसके साथ ही अयोध्याकांड का समापन होने पर आरती एवं प्रसाद वितरण से हुआ। कथा के दौरान इस मौके पर राजीव मेहरोत्रा, नीरज रस्तोगी, प्रभात शुक्ला, मीना शर्मा, आदित्य कुमार सिंह, संतोष मिश्रा, प्रेमा मिश्रा, जलालाबाद के विधायक हरिप्रकाश वर्मा, सुरेश सिंघल आदि मौजूद रहे।