पुवायां (शाहजहांपुर)। लगभग पांच सौ वर्ष पूर्व बने गांव मुड़िया कुर्मियात का 52 दरवाजा मंदिर काफी जर्जर हो चला है। पुरातात्विक महत्ता के इस मंदिर पर आज तक किसी भी सरकार ने ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी है।
पुजारी मुकुट बिहारी वाजपेयी के अनुसार कोणार्क के सूर्य मंदिर की तर्ज पर बने इस मंदिर का निर्माण गांव के दो सगे जमींदार भाइयों चूरामणि और बुद्धसेन ने कराया था। कुछ लोग मंदिर को आगरा के राधाकृष्ण मंदिर की तर्ज पर बना बताते हैं। मंदिर ककइया ईंटों, चूने, सुर्खी से बना हुआ है। मंदिर के पश्चिम की तरफ पुजारी के रहने और संत-महात्माओं के ठहरने के कमरे बने थे जो अब कभी ढह सकते हैं। मंदिर प्रांगण में कुंआ बना हुआ है। काफी ऊंचाई पर बने मंदिर के चारों ओर छोटे मंदिर बने हुए हैं। इसे स्वामी नारायण मंदिर भी बोला जाता है। तांत्रोक्त विधि से निर्मित मंदिर में भगवान विष्णु, बलदाऊ, राधा जी सहित लगभग 16 प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर में 52 दरवाजे और 13 गुंबद हैं। मंदिर में जिस दरवाजे से प्रवेश करते हैं, ज्यादा दरवाजे होने के कारण उससे निकलना काफी मुश्किल हो जाता है।
वास्तुकला का बेजोड़ संगम है मंदिर
गांव के लोग बताते हैं कि वास्तुकला केे बेजोड़ संगम 52 दरवाजा मंदिर में निर्माण केे समय मंदिर में काफी सोना भी लगा था और राधा कृष्ण की अष्टधातु की प्रतिमा भी थी जो अब नहीं है। बताया जाता है कि मंदिर निर्माण में 12 वर्ष का समय लगा था। मंदिर में भगवान विष्णु की काले पत्थर की प्रतिमा है। मंदिर के चारों ओर बेल बूटों की चित्रकारी है। मुख्य दरवाजे को खोलते ही राधा कृष्ण की प्रतिमा के दर्शन होते हैं। मंदिर के दोनों दरवाजों पर द्वारपाल भी उकेरे गए हैं।
जन्माष्टमी पर लगता है बड़ा मेला
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर 52 दरवाजा मंदिर पर बड़ा मेला लगता है। नि:संतान दंपती यहां संतान प्राप्ति के लिए मनौती मांगते हैं। इसके अलावा कई जिलों से लोग यहां पर बच्चों का मुंडन संस्कार कराने आते हैं। मंदिर की देखरेख एक ट्रस्ट के हवाले है।