सेहरामऊ दक्षिणी। मां जालिपा देवी के ऐतिहासिक मंदिर में लगने वाले वार्षिक मेले की तैयारियां शुरू हो गईं। बाहर से आए दुकानदारों ने दुकानें सजानी शुरू कर दी हैं। झूले और अन्य खेल-तमाशे बच्चोें के आकर्षण का केंद्र बनेंगे।
पलिया-लखनऊ हाईवे पर सेहरामऊ दक्षिणी के गांव कुतुआपुर में स्थित देवी मां जालिपा मंदिर का उल्लेख महर्षि जगनिक द्वारा रचित आल्हखंड में सियरमऊ के नाम से किया गया है। जानकारों के अनुसार, आल्हखंंड में आल्हा-ऊदल की ईष्ट देवी मां जालिपा देवी का वर्णन किया गया है।
किवदंती है कि देवी मां जालिपा का हवन-पूजन करने आल्हा, ऊदल मंदिर आया करते थे। आषाढ़ मास की अमावस्या के बाद पहले सोमवार यानी आठ जुलाई को मंदिर परिसर में लगने वाले एक दिवसीय मेले में श्रद्धालुओें की अपार भीड़ उमड़ती है। मेले में दुकानें लगाने बाहर से तमाम दुकानदार और झूले वाले आ गए हैं। मेले को लेकर क्षेत्रीय गांवों के बाशिंदों ने भी सुदूर गांवों तथा शहरों में रहने वाले नाते-रिश्तेदारों समेत पारिवारिक सदस्यों की आवभगत की तैयारियां शुरू कर दी हैं। संवाद