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शाहजहाँपुर: माटी के मोल बिक रहा सब्जियों का राजा आलू

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बहादुरगंज सब्जी मंडी में बिक्री के लिए रखा आलू । संवाद
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-थोक भाव काफी गिरने से गलियों में 50 रुपये के सात किलो की हांक लगा रहे ठेले वाले
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शाहजहांपुर। आलू की अगैती फसल खेतों से खुदकर बाजार में पहुंचने के साथ ही इसके दाम एकदम नीचे आ गए हैं। ठेले वाले 50 रुपये के सात किलो की हांक लगाते हुए गलियों में घूम रहे हैैं, जबकि गत वर्ष इन्हीं दिनों 15 से 20 रुपये किलो फुटकर भाव पर आलू बिका था। तब मार्च के पहले सप्ताह में आलू की कीमतें गिरी थीं।
मंडी में आलू थोक भाव पर 400 से 600 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। एक माह पहले तक नया आलू 1100 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिक चुका है। आलू के दामों में अचानक गिरावट से किसान खासे परेशान हैं क्योंकि उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है। दो वर्ष पहले तक जिले में आलू का रकबा 10500 हेक्टेयर तक सीमित था, लेकिन उस दौरान आलू के दाम चढ़े तो किसानों का आलू की खेती की ओर रुझान बढ़ने लगा। पिछले साल 11720 हेक्टेयर में आलू की खेती हुई थी। होली से पहले आलू के दाम चढ़ जाने के कारण इस बार किसानों ने आलू का रकबा बढ़ाकर करीब 14000 हेक्टेयर कर लिया। यही वजह है कि खेत से अगैती आलू की निकासी शुरू होते ही उसके भाव नीचे आ गए हैं। इससे वह किसान बहुत परेशान हैं, जिन्होंने अच्छा भाव मिलने की उम्मीद में आलू की फसल की है। अभी आलू की पिछैती फसल तैयार हो रही है और उसकी खोदाई शुरू होने पर भाव और नीचे जाने के आसार हैं।
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आलू के भाव गिरने की बड़ी वजह शीतगृह शुरू न होना
आलू को सड़ने से बचाने के लिए बड़े किसान अपनी उपज शीतगृहों में भंडारित कराते हैं। जिले में 27 शीतगृह हैं, लेकिन उनमें से कई अब तक बंद हैं। कुछ शीतगृह मालिक क्लीनिंग के बहाने आलू भंडारण से बच रहे हैं। कांट क्षेत्र के प्रगतिशील किसान कौशल मिश्रा के अनुसार कई कोल्ड स्टोर बंद होने से किसानों को मजबूरी में अपनी उपज मंडियों की आढ़तों और खुले बाजार में सस्ते दामों पर बेचनी पड़ रही है। गत वर्ष आलू उत्पादकों को नुकसान से बचाने और उन्हें लागत मूल्य दिलाने के लिये सरकार ने कई जनपदों में ऑपरेशन ग्रीन योजना के तहत उन किसानों को प्रति क्विंटल निर्धारित अनुदान का लाभ दिया, जिन्हें अपनी उपज भंडारित करने को निकट के शीतगृहों में जगह नहीं मिली, लेकिन इस बार शासन से ऐसी कोई पहल नहीं हुई है।

किसानों की बात
इस बार चार एकड़ खेत में आलू किया है। एक एकड़ आलू तैयार करने में 25 हजार रुपये की लागत आती है। पैदावार तो सही है, लेकिन इस बार रेट बहुत कम होने से नुकसान की आशंका है।
-साबिर खां, खेड़ा रठ (जैतीपुर)


मैं हर वर्ष चार से छह एकड़ में आलू बोता हूं। इस बार तीन एकड़ आलू किया है। दाम बहुत कम मिल रहे हैं। प्रति एकड़ 22 से 25 हजार रुपये लागत पर खर्च हो जाते हैं। कच्चा आलू बिक चुका है।
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-अभिनव विक्रम सिंह, खेड़ा बझेड़ा (जैतीपुर)

औद्यानिक श्रेणी की आलू, प्याज, टमाटर जैसी फसलों के भाव दैनिक आवक और खपत के अनुसार घटते-बढ़ते रहते हैं। इसलिए इन फसलों को ऑपरेशन ग्रीन योजना में शामिल किया गया था, लेकिन इस बार यह योजना अभी लागू नहीं हुई है। अधिकांश शीतगृह चालू हो चुके हैं। शीतगृह संचालकों के साथ बैठक कर सभी शीतगृह चालू कराए जाएंगे ताकि उनमें क्षमता के अनुरूप किसान अपना आलू भंडारित करा सकें। इस बार रकबा बढ़ने से आलू की पैदावार भी बढ़ी और इसीलिए उसके रेट गिरे हैं।
-राघवेंद्र सिंह, जिला उद्यान अधिकारी

बहादुरगंज सब्जी मंडी में बिक्री के लिए रखा आलू । संवाद

बहादुरगंज सब्जी मंडी में बिक्री के लिए रखा आलू । संवाद

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