विश्व सांकेतिक भाषा दिवस पर पुलिस लाइन में सांकेतिक भाषा के बारे में जानकारी दी गई। संवाद
शाहजहांपुर। पुलिसकर्मी अब मूकबधिरों से सांकेतिक भाषा में बात कर उनकी समस्या को समझ सकेंगे। इसके लिए पुलिस लाइन में सोमवार को जनसुनवाई बधिर जन के लिए कार्यक्रम के तहत पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिनियम के तहत दिव्यांगजनों के अधिकारों के संवर्धन के लिए जिले में संस्कृति एवं आमोद प्रमोद केंद्रों की स्थापना की जाएगी। इसके लिए दिव्यागंजन मूकबधिरों के साथ आपसी समन्वय स्थापित करने के लिए पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। सोमवार को पुलिस विभाग और एसोसिएशन ऑफ द डीफ वेलफेयर की ओर से आयोजित कार्यशाला में नुपुर संस्थान के संस्थापक मनोज भारद्वाज ने सांकेतिक भाषा को समझाया और डीफ एडवोकेसी ऑफिसर तरुण कुमार शर्मा ने प्रशिक्षण दिया। मूकबधिरों के साथ सांकेतिक भाषा में बात करने और उचित व्यवहार के लिए पुलिस कर्मियों को बताया गया।
कहा कि किसी पीड़ित दिव्यांगजन मूकबधिर के आने पर उससे सांकेतिक भाषा में बात कर सबसे पहले धैर्य रखने के लिए कहें। इसके बाद पानी पीने के लिए बोलें, जब पीड़ित व्यक्ति शांत हो जाए तब बात आगे बढ़ाएं। उसकी बात सुनने का संकेत दें, जिससे वो अपनी बात को समझा सके। इसके लिए विशेषज्ञ की मदद लें। पुलिस कर्मियों को सिखाई गई सांकेतिक भाषा का टेस्ट भी लिया गया। इसमें महिला पुलिस कर्मियों ने बेहतर ढंग से प्रदर्शन किया। इस मौके पर पुलिस विभाग से मनोज अवस्थी, बरेली मंडल बधिर संघ बरेली के महासचिव अमन सक्सेना, सहयोग संस्था अध्यक्ष नेहा यादव सक्सेना, निखिल महेंद्रु आदि मौजूद रहे।