शाहजहांपुर। कांट थाना क्षेत्र के मोहल्ला गढ़ी पश्चिमी निवासी युवक राजवीर की लॉकअप में मौत के मामले में जेल गए सेवानिवृत्त दरोगा श्रीकृष्ण चौधरी व सिपाही राजेंद्र की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई।
16 साल पहले युवक के लापता होने पर कांट पुलिस ने छोटेलाल के पुत्र राजवीर उर्फ सूरज को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस लॉकअप में उसकी पीटकर हत्या कर दी गई थी। परिजनों की तहरीर पर धारा 302, 342 व एससी एसटी एक्ट में रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। मुकदमे में उस समय थाना प्रभारी रहे विजयपाल सिंह, उप निरीक्षक श्रीकृष्ण चौधरी, सिपाही राजेंद्र सिंह, जगपाल सिंह, जसराम सिंह, गजराज सिंह, कृपाल सिंह, शैलेंद्र सिंह, श्रीकृष्ण वर्मा व होमगार्ड नेत्रपाल को नामजद किया गया था। नामजद कृपाल व शैलेंद्र की मौत हो चुकी है। सीबीसीआईडी ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था।
कई बार वारंट जारी होने के बाद भी आरोपियों के नहीं आने पर कोर्ट ने डीजीपी से पत्राचार किया। 16 साल बाद रिटायर दरोगा श्रीकृष्ण चौधरी चार अक्तूबर को कोर्ट में हाजिर हुए। वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इसके बाद हरदोई निवासी सिपाही राजेंद्र सिंह भी कोर्ट में हाजिर हुआ, उसे भी जेल जाना पड़ा। मंगलवार को श्रीकृष्ण चौधरी व राजेंद्र सिंह की जमानत अर्जी विशेष न्यायाधीश एससी एसटी कोर्ट में पेश की गई। विशेष लोक अभियोजक नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि वादी मुकदमा छोटेलाल के अधिवक्ता ओमेंद्र सिंह यादव व उन्होंने जमानत दिए जाने का विरोध किया। जबकि अभियुक्त की पैरवी करने वाले वकील ने मामले को असत्य बताते हुए रंजिशन फंसाने की दलील दी। दोनों पक्षों की बहस को सुनने के न्यायाधीश अखिलेश पाठक ने जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।