फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना निपटा तब बने प्लांट, अब तक न दे सके ऑक्सीजन

सार

कोविड-19 की दूसरी लहर में ऑक्सीजन के एक-एक सिलिंडर को लेकर मारामारी मची थी।प्लांट लगने के बाद भी टेक्नीशियन की नियुक्ति नहीं हो सकी है।सीएचसी प्रभारी डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि प्लांट चलने से डेढ़ से दो माह लगे सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

शाहजहांपुर। कोविड-19 की दूसरी लहर में ऑक्सीजन के एक-एक सिलिंडर को लेकर मारामारी मची थी। उस समय हर सीएचसी में ऑक्सीजन प्लांट लगाने की कवायद पुरजोर तरीके से शुरू हुई थी। कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम होने के साथ ही ऑक्सीजन प्लांट प्राथमिकता से हट गए। यही वजह है कि कई सीएचसी में अब तक प्लांट नहीं बन सके, जलालाबाद और पुवायां में प्लांट लगने के बावजूद लोगों को इनका लाभ नहीं मिल रहा।
विज्ञापन

प्लांट होने के बाद भी ऑक्सीजन के लिए जिले पर निर्भरता
जलालाबाद। कोरोना काल में सीएचसी पर ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया गया था। प्लांट लगने के बाद भी टेक्नीशियन की नियुक्ति नहीं हो सकी है। ऐसी स्थिति में प्लांट होने के बाद भी सीएचसी पर आने वाले मरीजों के लिए जिला मुख्यालय से सिलिंडर की सप्लाई मंगानी पड़ती है। प्लांट में ऑक्सीजन के स्टोरेज, लीकेज व पाइपलाइन के प्रेशर आदि को चेक करने का काम ऑपरेटर नीरज संभालते हैं। अस्पताल आने वाले मरीजों के लिए सिलिंडर व कंसंट्रेटर आदि का उपयोग किया जाता है। ऑक्सीजन की खपत मरीज की संख्या के अनुसार होती है। हालांकि महीने में औसतन दो से तीन ऑक्सीजन सिलिंडर लग जाते है। प्लांट होने के बाद भी सीएचसी पर ऑक्सीजन की सप्लाई जिले से मिलती है। टेक्नीशियन की नियुक्ति को लेकर अधिकारी एकमत नहीं हैं। चिकित्साधीक्षक डॉ. अमित यादव ने बताया कि टेक्नीशियन की नियुक्ति को लेकर उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा है। वहीं सीएमओ डॉ. आरके गौतम ने बताया कि सीएचसी पर टेक्नीशियन की तैनाती है।
पुवायां में ऑक्सीजन प्लांट तैयार, जल्द नहीं मिलेगी सुविधा
पुवायां। सीएचसी पर ऑक्सीजन प्लांट बनकर तैयार हो चुका है। एक कंपनी ने करीब साठ लाख खर्च करके इस प्लांट का निर्माण कराया था। पाइप लाइन डाली जा चुकी है। सीएचसी पर टेक्नीशियन की तैनाती नहीं है। सीएचसी पर अभी सिलिंडर से ऑक्सीजन की जरूरत पूरी की जाती है। प्रतिमाह 20 से 25 सिलिंडर खर्च हो जाते हैं। सीएचसी प्रभारी डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि प्लांट चलने से डेढ़ से दो माह लगे सकते हैं। प्लांट चलने से सिलिंडर का झंझट खत्म हो जाएगा और रोगियों को काफी सुविधा रहेगी।
विज्ञापन

स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्माण की गति धीमी
ददरौल, मीरानपुर कटरा, खुटार आदि सीएचसी पर आक्सीजन जेनरेट प्लांट लगाने का काम चल रहा है। ये सितंबर माह में शुरू होने थे। धीमी गति से काम होने से अभी तक प्लांट से आक्सीजन की सप्लाई वार्डों तक नहीं पहुंच पा रही है। संभावना है कि जल्द यहां भी आक्सीजन की दिक्कत दूर हो जाएगी।
एक प्लांट खराब, तीन से मरीजों को मिली रही कृत्रिम सांस
-राजकीय मेडिकल कॉलेज में मरीजों को राहत देने के लिए चार ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। इनमें एक में तकनीकी खराबी आ गई जबकि तीन से रोगियों को ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कोविड-19 के समय एक निजी कंपनी ने 500 एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट दान स्वरूप राजकीय मेडिकल कॉलेज को भेंट किया था। इसके अलावा 960-960 एलपीएम के दो व एक हजार लीटर की क्षमता का एक प्लांट हैं। कुछ दिन पहले दान में मिले प्लांट में तकनीकी खराबी आ गई थी।
80 लाख की लागत से लगेगा लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट
-शासन के निर्देश के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाए जाने का खाका खींचा गया है। उसके लिए 80 लाख रुपये खर्च किया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि प्लांट में एक सप्ताह की सप्लाई एक बार में मिलेगी। उसके बाद दोबारा से रिफिल किया जा सकेगा। डीआरडीओ के ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट के पास ही इस 20 किलोलीटर के प्लांट के लिए जगह फाइनल की गई।
हमारे पास चार प्लांट है, इनमें एक में तकनीकी खराबी आ गई। तीन क्रियाशील हैं। लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट के लिए फाइल शासन को भेजी गई। वहां से स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू कराया जाएगा। - डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज
जलालाबाद में ऑक्सीजन प्लांट लगा है। वहां टेक्नीशियन तैनात है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में बेहतर व्यवस्थाएं हैं। मैंने हाल ही में ज्वाइन किया है, जल्द ही व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाएंगी। - डॉ. आरके गौतम, सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें