शाहजहांपुर। रेलवे के दो विभागों की लापरवाही के कारण जनसेवा एक्सप्रेस के साधारण कोच में युवक का शव सैकड़ों किलोमीटर तक पड़ा रहा। नियम के अनुसार, जहां पर ट्रेन बनकर चलेगी, वहां पानी भरा जाता है, साथ ही सफाई की जाती है। दो विभागों के कर्मचारियों ने ट्रेन के शौचालय का लॉक खुलवाने का प्रयास ही नहीं किया।
रविवार जनसेवा एक्सप्रेस ट्रेन बनमनखी से चलने के बाद पूरी बोगी में दुर्गंध फैली थी। रोजा स्टेशन पर 890 किलोमीटर के बाद ट्रेन को रुकवाकर शौचालय चेक कराया गया। शौचालय अंदर से बंद होने के कारण दरवाजा तोड़कर शव निकाला गया। रेलवे के कैरिज विभाग से सेवानिवृत्त एक अधिकारी ने बताया कि ट्रेन के अंतिम स्टेशन पर पहुंचने पर उसकी सफाई की जाती है। शौचालय को साफ करने के साथ ही पानी भरा जाता है। धुलाई भी होती है। संभव है कि दरवाजा नहीं खुलने के कारण ठेकेदार के सफाईकर्मी ने ध्यान न दिया हो। सुबह जनसेवा एक्सप्रेस को रोजा स्टेशन पर रोके जाने के कारण पंजाब मेल करीब 30 मिनट तक खड़ी रही। इसके चलते यात्रियों को काफी दुश्वारियों से जूझना पड़ा।
सिटकनी पर ठोकर के बाद दरवाजा खोलना संभव नहीं
रेलवे के सेवानिवृत्त अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक शौचालय के गेट पर एक लैच (सिटकनी) होती है। लैच पर हथौड़े का जोरदार प्रहार होने के बाद दरवाजा खोलना संभव नहीं हो पाता है। ऐसे में उसे तकनीक से ही कर्मचारी खोलते हैं। संभव है कि किसी ने युवक की हत्या कर शव शौचालय में डालकर लैच पर प्रहार कर बंद कर दिया हो। या यह भी हो सकता है कि अंदर से बंद करने के बाद व्यक्ति की मौत हो गई हो।
अभी तक यह हुई घटनाएं
सितंबर महीने में बिहार के युवक की पत्नी की मोरध्वज एक्सप्रेस में बीमारी के चलते मौत हो गई थी। उसने 500 किलोमीटर तक का सफर ट्रेन में किया और किसी को खबर नहीं लगने दी।
2020 में लखनऊ दिशा की ओर जाने वाली ट्रेन के शौचालय की सीट में महिला का पैर फंस गया था। सीट को काटने के बाद उसका पैर निकाला गया था।
जुलाई माह में 4009 मोतिहारी एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था।