पुवायां में पत्रकारों से बात करते स्वामी यतींद्रानंद गिरि। संवाद
पुवायां। श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के पीठाधीश्वर, महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने कहा कि संसार में देव और दैत्य दोनों प्रवृत्तियां हैं। जो देव प्रवृत्ति को नहीं मानते, रामचरित मानस और राम चरित्र को नहीं मानते, मानवीय सभ्यता को नहीं मानते, राम का विरोध करते हैं, राम से सहमत नहीं हैं, वे सच्चे भारतीय नहीं हैं।
यतींद्रानंद गिरि बृहस्पतिवार को पुवायां में आरएसएस के पूर्व जिला प्रचारक जीत प्रसाद अग्निहोत्री, अनुपम अग्निहोत्री के आवास पर पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रामचरित मानस और प्रभु श्रीराम का चरित्र शाश्वत है। जो मानव और मानव का धर्म है, चरित्र है, उसी का स्वरूप रामचरित मानस है।
महंत राजूदास और स्वामी प्रसाद मौर्या के बीच विवाद पर उन्होंने कहा कि अभी उन्हें राजूदास के मामले की जानकारी नहीं है। महंत राजूदास प्रखर संत है। आज देश के अंदर संक्रमण काल है। देश फिर से करवट बदल रहा है। कभी देश सोने की चिड़िया और विश्व गुरु कहलाता था, तब संपूर्ण रूप से सनातन संस्कृति थी, वही देश का आधार थी। हिंदू संस्कृति को तोड़ने की कोशिश विधर्मी करते आ रहे हैं।
धीरेंद्र शास्त्री पर लगाए जा रहे आरोपोंं पर उन्होंने कहा कि लोगों को सिर्फ इसलिए तकलीफ हो रही है कि अभी तक ईसाई मिशनरी पाखंड करके खुले मंचों से भोले भाले लोगों को ईसाई बनाती थीं। आज ऐसे लोगों को धर्म का स्वरूप समझाते हुए धीरेंद्र शास्त्री मूल धर्म में वापस ला रहे हैं। सारा विरोध इसीलिए हो रहा है कि धीरेंद्र शास्त्री मिशनरियों की राह में रोड़ा क्यों बन रहे हैं। इस कुचक्र को समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सनातन हिंदू धर्म और संस्कृति प्रकृति ने मानव के लिए बनाई है। न्याय का रास्ता हो, नेकी का रास्ता हो, धर्म हमको यही सिखाता है। देश से धर्मनिरपेक्षता समाप्त होनी चाहिए। जहां धर्म नहीं होता, वहां अधर्म होता है। जहां प्रकाश नहीं होता, वहां अंधकार होता है। सभी लोग सनातन धर्म का प्रचार करें, मानवता का प्रचार करें। इससे पूर्व नगर के तमाम लोगों ने स्वामी यतींद्रानंद का स्वागत किया। इस दौरान धीरज शर्मा, राजेश शुक्ला, गौरव अवस्थी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।