शाहजहांपुर। जिला अस्पताल से राजकीय मेडिकल कॉलेज बनने के बाद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नसीब नहीं हो पा रहीं हैं। तमाम विभागों को हाईटेक सुविधाएं देने के बावजूद अल्ट्रासाउंड सेंटर की ओर ध्यान नहीं दिया गया। यहां अब भी पुरानी मशीन से अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। अनुभवी रेडियोलॉजिस्ट की कमी व वर्षों पुरानी मशीन से स्थिति स्पष्ट न होने के कारण डॉक्टर भी निजी सेंटरों के अल्ट्रासाउंड पर भरोसा करते हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर दिन 15 से 18 सौ मरीज दवा लेने आते हैं। अस्पताल के अल्ट्रासाउंड सेंटर पर रोजाना 30 से 40 मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया जाता है। दूर-दराज से आने वाले मरीजों के पर्चे पर डॉक्टर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लिख देते हैं। नि:शुल्क अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मरीज अपना समय भी खर्च करते हैं, लेकिन जब रिपोर्ट आती है तो डॉक्टर को उसमें कुछ खास समझ में नहीं आता है। वर्षो पुरानी मशीन के ब्लैक एंड व्हाइट अल्ट्रासाउंड में स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती है। इसके चलते सरकारी डॉक्टर भी दोबारा अल्ट्रासाउंड कराने के लिए निजी सेंटरों को भेज देते हैं। ऐसे एक नहीं, बल्कि कई मामले में प्रकाश में आए हैं।
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केस एक
-कांट निवासी फराह खान ने पित्त में पथरी होने पर सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराया। रिपोर्ट देखकर उनकी चिंता बढ़ गई। अल्ट्रासाउंड में पित्त के ऊपर मांस बढ़ने की बात रिपोर्ट में आ रही थी। डॉक्टर ने राजकीय मेडिकल कॉलेज के सामने निजी सेंटर भेज दिया। जहां अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट में कुछ नहीं मिला। सीटी स्कैन भी सब ठीकठाक मिला।
केस टू-
-ददरौल निवासी उर्मिला ने अल्ट्रासाउंड कराया। उनके पित्त में मवाद आने की रिपोर्ट आई। डॉक्टर के पास गए तो उन्होंने गंभीर स्थिति बताई। निर्मला ने दोबारा से निजी सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराया तो सब ठीक मिला। निर्मला ने सरकारी अल्ट्रासाउंड को लेकर आपत्ति जताई, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई।
रेडियोलॉजिस्ट रिटायर, एसआर के कंधे जिम्मेदारी
-राजकीय मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजिस्ट डॉ.एमपी गंगवार सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वह गेस्ट फैकल्टी के तौर पर जिम्मेदारी संभाले हैं। उनके पास अन्य विभागीय कार्य अधिक रहते हैं। इसके चलते अल्ट्रासाउंड की जिम्मेदारी सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर अन्य मेडिकल छात्रों के सहारे पर है।
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-अल्ट्रासाउंड की मशीन काफी पुरानी है। नई मशीन के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। जल्द ही मिलने की संभावना है। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट डॉक्टर के समझ न आने पर सेंटर पर आकर बात करनी चाहिए।
डॉ. एमपी गंगवार, विभागाध्यक्ष रेडियोलॉजिस्ट, राजकीय मेडिकल कॉलेज।
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अल्ट्रासाउंड के लिए मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर हैं। वे अल्ट्रासाउंड करते हैं। मानक के अनुरूप स्टाफ रखने के लिए पत्राचार किया जाएगा।
डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज।