इस सत्र में असम संसदीय सचिव डॉ. मानसिंह रंगपी ने कहा कि परिषद से ज्ञान लेकर यहां के अनुभवों का इस्तेमाल असम में चीनी उद्योग को बसाने में किया जाएगा। वहां चार नई चीनी मिलों को प्रारंभ करने का काम प्रगति पर है। मध्य प्रदेश के कृषक केशव राव लिखितकर ने कहा कि वह मध्य प्रदेश सरकार से अनुरोध करेंगे कि वहां गन्ना शोध संस्थान की स्थापना की जाये ताकि वहॉं के किसान लाभान्वित हो सकें। निदेशक ने सभी प्रक्षिणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किया। संचालन प्रसार अधिकारी संजीव कुमार पाठक ने किया। फिर निदेशक ने प्रशिक्षणार्थियों को लैब और प्रक्षेत्र का भ्रमण कर समझाया कि कैसे गन्ने के साथ खाद्यान्न वाले फसलों की अंत:फसली खेती से कम कृषि लागत में अच्छी आय का साधन किसान को मिल सकता है। परिसर में गन्ने के साथ गोभी, लहसुन, गेहूं आदि की खेती का नमूना भी दिखाया। इस दौरान साथ रही परिषद के वैज्ञानिकों की टीम में डॉ. अतुल सिंह, डॉ. केपी पांडेय, वीके श्रीवास्तव, डॉ. एसपी सिंह, डॉ. एसपी यादव, वीसी जादौन, डॉ. प्रियंका सिंह, सुनील कुमार विश्वकर्मा, डॉ. सोनिया यादव आदि शामिल थे।