पुवायां/मझिगवां। गांव मुड़िया कुर्मियात पीएचसी पर स्टाफ की भारी कमी है। लोगों ने परिसर में अपने जानवर बांधने शुरू कर दिए हैं। बीमार इलाज के लिए पुवायां और बंडा सीएचसी के चक्कर लगा रहे हैं। स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए प्रयास न होने से आसपास के लोगों को पीएचसी का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
मुड़िया कुर्मियात पीएचसी के आसपास 14-15 गांव ऐसे हैं, जो इस पीएचसी से लाभान्वित हो सकते हैं, लेकिन व्यवस्थाएं दुरस्त न होने के कारण रोगियों को दूरदराज के अस्पतालों में जाना पड़ता है। वर्तमान में अस्पताल में एक फार्मासिस्ट अनुराग कुमार, आयुष चिकित्सक अजय कुमार, लैब टेक्नीशियन विनय देव शर्मा, सफाई कर्मचारी विनीत कुमार की तैनाती है। वार्ड ब्वॉय सुमित मेहरोत्रा को एक जनवरी से बंडा सीएचसी से संबद्ध कर दिया गया है। आयुष चिकित्सक अजय कुमार को हफ्ते में दो-तीन दिन बंडा सीएचसी पर ड्यूटी देनी पड़ती है। फार्मासिस्ट अनुराग कुमार ने बताया कि इस समय 15 से 20 मरीज प्रतिदिन आते हैं। पीएचसी में ज्यादातर दवाएं उपलब्ध है।
टूटी पड़ी है बाउंड्री, भारी गंदगी
पीएचसी की बाउंड्रीवॉल काफी समय से टूटी है। इससे छुट्टा पशु अंदर आ जाते हैं। दीवार के पास लोगों ने गन्ने का ढेर लगा रखा है। वहां पशु भी बांधते हैं। पीएचसी स्टाफ का टॉयलेट बेहद गंदा है। पानी की टंकी भी ठप पड़ी है। परिसर में लगा एक इंडिया मार्का हैंडपंप ही पानी का एकमात्र सहारा है।
डॉक्टर की स्थायी तैनाती हो
मुड़िया कुर्मियात पीएचसी पर स्थाई डॉक्टर और स्टॉफ की बहुत ज्यादा जरूरत है। डॉक्टर को बंडा भी जाना पड़ता है, इससे रोगियों को वापस लौटना पड़ता है। यही कारण है कि यहां बेहद कम लोग दवा लेने जाते हैं। - रोहित मिश्रा, गांव सबलापुर
दवाओं की किल्लत
मुड़िया कुर्मियात पीएचसी में स्टाफ और कुछ दवाओं की समस्या है। बहुत-सी दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं। इस कारण मरीजों को निजी डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है। पीएचसी की हालत सही हो जाए तो लोगों को बड़ा लाभ मिलेगा। - अमन शुक्ला, गांव बनिगवां