पुवायां तहसील क्षेत्र में सड़क किनारे लगा पराली का ढेर। स्रोत : विकास विभाग
शाहजहांपुर। प्रशासन के तमाम प्रयास के बाद भी जिले में सबसे ज्यादा पराली जल रही है। अब तक 39 मामले सामने आ चुके हैं। इसका कारण माना जा रहा है कि बायोमास बनाने वाले प्लांट में इसकी खरीद नहीं हो रही है। ऐसे में सीडीओ ने खेतों में पड़ी पराली को गोशाला पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
कृषि विभाग के मुताबिक, शाहजहांपुर में फसल की कटाई के बाद दस से 12 लाख टन पराली का उत्पादन होता है। पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण के मद्देनजर शासन के निर्देश पर प्रशासन ने घटनाओं की रोकथाम की जिम्मेदारी जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ ही एसडीएम को भी सौंपी थी। डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने अधिकारियों को ग्रामीणों के बीच जाकर पराली के बेहतर प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए गए थे। करीब 90 प्रतिशत धान की कटाई हो चुकी है। इसके बावजूद पराली जलाने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं।
एक बार फिर से पुवायां तहसील क्षेत्र में सबसे अधिक घटनाएं हुई हैं। पुवायां तहसील क्षेत्र में इस वर्ष में अब तक 21 घटनाएं हुई हैं। 2021 में 295, 2022 में 241 और 2023 में 65 घटनाएं दर्ज की गईं थीं। इसके बाद सदर क्षेत्र में सर्वाधिक 10 घटनाएं हुईं हैं। जलालाबाद और तिलहर में पराली जलाने की चार-चार घटनाएं हुईं हैं। हालांकि गत वर्षों के मुकाबले इस बार अब तक घटनाएं अपेक्षाकृत कम हैं, लेकिन दिवाली पर पराली जलाने की घटनाएं अचानक बढ़ सकती हैं।
पटाखे, बीड़ी की चिंगारी या अराजकतत्व द्वारा जानबूझकर सड़क किनारे पड़ी पराली जलाने से घटनाएं बढ़ती हैं। इसीलिए प्रशासन का पूरा ध्यान पराली उठवाकर गोशाला में भिजवाने पर है।
एक साथ पराली निकलने से प्रबंधन में आ रही दिक्कत
कृषि उपनिदेशक धीरेंद्र सिंह ने बताया कि सामान्य तौर पर पुवायां से धान कटाई शुरू होती है। फिर सदर और जलालाबाद में कटाई रफ्तार पकड़ती है। इस बार अक्तूबर में बारिश होने से सभी तहसीलों में एक साथ धान कटाई शुरू हो गई। एक साथ पराली निकलने के कारण प्रबंधन में दिक्कत हो रही है। गत वर्ष दस हजार टन पराली एफपीओ के माध्यम से बदायूं के एचपीसीएल प्लांट भेजी गई थी। इस वर्ष प्लांट में आपूर्ति नहीं की जा रही है। बताया जा रहा है कि मशीनें खराब होने से क्षमता के अनुसार प्लांट चल नहीं पा रहा है। इसलिए खरीद भी नहीं की जा रही। फिर भी प्रयास कर गत्ता फैक्टरियों आदि को पराली आपूर्ति की जा रही है। हालांकि प्लांट में 300 रुपये प्रति क्विंटल पराली जाती थी, लेकिन अन्य फैक्टरियों में 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल ही भुगतान होता है। इसके अलावा सड़क किनारे पड़ी करीब 257 टन पराली को गोशालाओं में भिजवाया जा चुका है।