शाहजहांपुर। कड़ाके की सर्दी में मानसिक तनाव के रोगी भी बढ़े हैं। इस विकार को डॉक्टर सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (सैड) कहते हैं। सैड सिंड्रोम की चपेट में आने से मरीज के स्वभाव में आक्रामकता आने के साथ ही नकारात्मक विचार मन में आते हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना ही ऐसे आठ से दस मरीज पहुंच रहे हैं। मरीजों की काउंसलिंग और दवा के जरिये उपचार किया जा रहा है।
क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक डॉ. रोहिताश कुमार बताते हैं कि व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य में कुछ बदलाव दिखें तो संभव है कि सैड सिंड्रोम के शिकार हो रहे हैं। ठंड में यह समस्या शुरू होती है।
ये हैं लक्षण
-शरीर में कमजोरी और थकान लगना।
-उदासी के साथ नकारात्मक विचार आना।
-जरा-सी बात पर आक्रामक हो जाना।
-भूख कम लगना और रात में जागना।
केस 1
-जलालाबाद के एक मोहल्ले के रहने वाला 34 वर्षीय युवक उदास रहने लगा। जरा सी बात पर क्रोधित हो जाने और खुद का जीवन खत्म करने के उसके मन में विचार आते थे। परिजन उसे लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां काउंसलिंग के साथ दवा दी गई।
केस 2
-शहर के बहादुरगंज निवासी 53 साल के व्यक्ति ने अस्पताल की ओपीडी में मनोचिकित्सक से अपनी बीमारी को लेकर चर्चा की। उसने बताया कि गर्मी में वह ठीक रहता है, लेकिन सर्दी में थकान और नकारात्मक विचार आते हैं। स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ गया है। दवा और काउंसलिंग के बाद अब उसकी स्थिति ठीक है।
इस समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार लक्षण लंबे समय तक रहने से दिक्कत आ जाती है। मौसम में बदलाव के चलते यह समस्या आती है। काउंसलिंग और दवा से मरीज का उपचार किया जाता है।
डॉ. रोहिताश कुमार, क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक, राजकीय मेडिकल कॉलेज