शाहजहांपुर। गर्रा नदी के उफनाने पर बाढ़ का पानी वार्डों में भरने पर राजकीय मेडिकल कॉलेज को खाली करा लिया गया। बाढ़ का पानी वार्डों, ट्राॅमा सेंटर और ओपीडी में भरने के बाद मरीजों को निकाला गया। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद मरीजों को अस्पताल से निकालने के बाद सीएचसी और निजी अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया। बाढ़ के चलते अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं ठप रहीं।
बुधवार की सुबह ही गर्रा नदी का पानी राजकीय मेडिकल कॉलेज के गेट के अंदर तक पहुंच गया था। जलस्तर बढ़ने के बाद स्थिति विकराल होने लगी। रात में पानी बढ़ने से अस्पताल के निचले तल पर बने मेल सर्जिकल वाॅर्ड, ट्राॅमा सेंटर और ओपीडी आदि तक पानी भर गया। वार्ड में पानी पहुंचने पर मरीजों में खलबली मच गई।
प्राचार्य डॉ.राजेश कुमार ने डीएम उमेश प्रताप को सूचना दी। इसके बाद बचाव कार्य को शुरू कर दिया गया। डीएम और एसपी ने मौका-मुआयना किया। अस्पताल में भर्ती करीब तीन सौ मरीजों को बाहर निकालने की कवायद शुरू हुई। कम गंभीर मरीजों को बस के जरिये निकाला गया। गर्भवती महिलाएं, ऑपरेशन और गंभीर रोग से पीड़ित मरीजों को स्ट्रेचर के जरिये बाहर लाया गया।
सीएमओ डॉ.आरके गौतम ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विजय पाठक व महासचिव डॉ. गौरव मिश्रा से सहयोग मांगा। डॉ. गौरव मिश्रा ने बताया कि मरीजों को अस्पताल में सहूलियत के साथ इलाज मुहैया कराया गया है। आपदा के समय में आईएमए पूरी मजबूती से स्वास्थ्य विभाग के साथ खड़ा हुआ है।
सीएमओ ने सरकारी और निजी अस्पतालाें की 20 एंबुलेंस मंगाकर मरीजों को वरुण अर्जुन मेडिकल कॉलेज, सीएचसी और निजी अस्पतालों में पहुंचाया। करीब पांच घंटे तक मरीजों को निकालने की कवायद चली। मेडिकल कॉलेज की बिजली सुबह ही गुल हो गई थी। जेनरेटर के पास पानी भर जाने से उनके भी ठप होने की आशंका है। प्राचार्य डॉ.राजेश कुमार बताया कि अस्पताल में करीब तीन सौ मरीज भर्ती थे। उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में शिफ्ट कर भर्ती कराया गया।
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बीमार हुए तो कहां जाएंगे ? अफसरों के पास नहीं जवाब
राजकीय मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाएं बाढ़ के पानी के चलते ठप हो गईं। नगरीय या ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के बीमार होने पर मरीज कहां जाएंगे? इसका जवाब स्वास्थ्य अधिकारियों के पास नहीं है। प्राचार्य डॉ.राजेश कुमार ने बताया कि उनके पास प्रारंभिक उपचार के लिए जगह नहीं है। सीएमओ डॉ.आरके गौतम ने बताया कि भावलखेड़ा और ददरौल में स्वास्थ्य सेवाएं शुरू की जा सकती हैं। उनके पास डॉक्टर उपलब्ध नहीं है। मेडिकल कॉलेज से डॉक्टर की टीम मिल जाए तो सुविधा दी जा सकती हैं।
अस्पताल में लाखों का नुकसान
बाढ़ के पानी में अस्पताल से लाखों का नुकसान हुआ है। कई प्रमुख वार्डों में जलभराव होने से मशीनें भीग गईं। प्रमुख दस्तावेज भी भीगने की उम्मीद है। दवाएं भी भीगने का अनुमान है। अधिकारियों के बताया कि पानी निकासी के बाद नुकसान का आकलन किया जाएगा। डायलिसिस यूनिट पूरी तरह तहस-नहस हो गई है।
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इनके प्रयास से मरीज आए बाहर
अस्पताल में बाढ़ का पानी भरने के बाद सीएमओ डॉ.आरके गौतम और प्राचार्य डॉ.राजेश कुमार ने मोर्चा संभाला। अस्पताल में हेल्प डेस्क मैनेजर रईस अहमद ने मरीजों को स्ट्रेचर पर लिटाकर तीमारदारों की मदद से निकाला।
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मरीजों को सीएचसी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। आपदा के समय में आईएमए से सहयोग मांगा गया है। रुहेलखंड अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए तिलहर से दवाएं व इंजेक्शन आदि उपलब्ध करा दिए गए हैं।
- डॉ. आरके गौतम, सीएमओ
राजकीय मेडिकल कॉलेज से एंबुलेंस को धक्का देकर निकालते लोग। संवाद
राजकीय मेडिकल कॉलेज से एंबुलेंस को धक्का देकर निकालते लोग। संवाद
राजकीय मेडिकल कॉलेज से एंबुलेंस को धक्का देकर निकालते लोग। संवाद
राजकीय मेडिकल कॉलेज से एंबुलेंस को धक्का देकर निकालते लोग। संवाद
राजकीय मेडिकल कॉलेज से एंबुलेंस को धक्का देकर निकालते लोग। संवाद
राजकीय मेडिकल कॉलेज से एंबुलेंस को धक्का देकर निकालते लोग। संवाद