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नगर निगम चुनाव : राजनीतिक दलों को सीट पर आरक्षण की तस्वीर साफ होने का इंतजार

सार

पांच साल से बगैर जनप्रतिनिधित्व के चल रहे नगर निगम को नवंबर-दिसंबर में पहला मेयर मिलने की उम्मीद है।मेयर के लिए अभी आवेदन नहीं, पर तैयारी पूरीनगर निगम के चुनाव को लेकर पार्टी अपनी तैयारी कर रही है।बात रही चुनाव लड़ने वालों की लंबी लाइन की तो भाजपा में संगठन है।
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विस्तार
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शाहजहांपुर। पांच साल से बगैर जनप्रतिनिधित्व के चल रहे नगर निगम को नवंबर-दिसंबर में पहला मेयर मिलने की उम्मीद है। लगातार चार बार से नगर पालिका पर भले सपा का वर्चस्व रहा पर मेयर चुनाव में भाजपा पूरी ताकत झोंकने के मूड में है। कांग्रेस-बसपा भी चौंका सकती है। अभी आरक्षण पर असमंजस से राजनीतिक दलों ने आवेदन लेने शुरू नहीं किए हैं।
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2017 में नगर पालिका के चुनाव में सीट महिला के लिए आरक्षित कर दी गई थी। सपा ने तब के चेयरमैन तनवीर खां की मां जहांआरा बेगम को टिकट दिया था जबकि भाजपा ने पूर्व एमएलसी जयेश प्रसाद की पत्नी नीलिमा देवी को प्रत्याशी बनाया था। सपा को 63300 वोट मिले जबकि भाजपा 57, 939 वोट पाकर हार गई थी। तब कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के जोर लगाने के बावजूद सपा ने किला कायम रखा था। थोड़े समय बाद ही नगर पालिका को निगम का दर्जा मिल गया और जहांआरा अपदस्थ हो गईं। नगर निगम बनने के बाद परिसीमन में नए क्षेत्र शामिल होने से भाजपा अपनी दावेदारी ज्यादा मजबूत आंक रही है। तब वार्ड 44 थे जो अब बढ़कर 60 हो चुके हैं। 22 नए गांव भी नगर निगम का हिस्सा बने हैं। तब नगर पालिका में 2,45, 646 वोटर थे। माना जा रहा है कि कम से कम 60 हजार वोटर इस बार बढ़ेंगे। सीट सामान्य रहने की दशा में हर दल के पास टिकट की इच्छा रखने वालों की भरमार है। वहीं सीट ओबीसी, अनुसूचित जाति के पाले में जाने पर छंटनी हो जाएगी। इसी के मद्देनजर अभी राजनीतिक दलों ने आवेदन स्वीकारना शुरू नहीं किया है।
भाजपा में 50 से ज्यादा दावेदार
टिकट को लेकर सबसे ज्यादा मारामारी भाजपा में है। पिछली बार टिकट न मिलने से मायूम तमाम दावेदारों को भाजपा ने भविष्य में ‘एडजस्ट’ करने का दिलासा दिया था। कुछ लोगों को विभिन्न तरीके से लाभ हुआ भी लेकिन काफी लोग इस बार मेयर के टिकट को लेकर आशान्वित हैं। 50 से ज्यादा ऐसे लोग हैं जो मंत्रियों के जरिये लामबंदी में लगे हैं।
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सपा में उठने लगे विरोध के स्वर
हाल के विधानसभा चुनाव में सपा से टिकट के लिए कई दावेदार सामने आए थे। हालांकि टिकट तीसरी बार भी तनवीर खां को दिया गया। उनकी हार के बाद से मेयर की टिकट में भी तनवीर की दावेदारी के खिलाफ विरोधी गुट खेमेबंदी करने लगा है। मेयर चुनाव में दूसरे प्रत्याशी को मौका दिए जाने की मांग पार्टी के अंदर उठने लगी है। हालांकि विधानसभा चुनाव में करीब एक लाख वोट पाने वाले तनवीर खां का मेयर के टिकट के लिए पलड़ा भारी दिख रहा है।
मेयर के लिए अभी आवेदन नहीं, पर तैयारी पूरी
नगर निगम के चुनाव को लेकर पार्टी अपनी तैयारी कर रही है। संगठन को मजबूत करने के लिए सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश स्तरीय नेता यहां आकर समीक्षा भी कर चुके हैं। अभी मेयर पद के लिए किसी ने आवेदन नहीं किया है। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद आवेदन होंगे।- तनवीर खां, निवर्तमान जिलाध्यक्ष-सपा
पार्टी जिसे प्रत्याशी बनाएंगे उसे पूरी ताकत से लड़ाएंगे
अभी आरक्षण की तस्वीर साफ नहीं है इसलिए आवेदन किसी ने नहीं किया है। बात रही चुनाव लड़ने वालों की लंबी लाइन की तो भाजपा में संगठन है। यहां पर बूथ स्तर का नेता भी बड़ा चुनाव लड़ सकता है। पार्टी जिसे प्रत्याशी बनाएगी, उसे पूरी ताकत से चुनाव लड़ाया जाएगा। - अरुण गुप्ता, महानगर अध्यक्ष-भाजपा
नगर पंचायतों में काफी बेहतर तैयारी
नगर निकाय का चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ा जाएगा। नगर पंचायतों में कांग्रेस की काफी बेहतर तैयारी है। विश्वास है कि पार्टी बेहतर प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज करेगी। - रजनीश गुप्ता, जिलाध्यक्ष-कांग्रेस
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