- कई साल से गर्मियों में बंद हो जा रही है सदानीरा कही जाने वाली गोमती की जलधार
संवाद न्यूज एजेंसी
पुवायां। कई साल से गोमती नदी की जलधार गर्मियों में रुक जाती है। इस वर्ष भी गर्मी ज्यादा होने पर धार बंद होने की आशंका है। इसका बड़ा कारण नदी की सफाई न होना और नदी तट तक कब्जा कर की जा रही खेती है।
किवदंती है कि इंद्र ने एक बार गौतम ऋषि का रूप धर कर उनकी पत्नी अहिल्या से छल किया था। कुपित गौतम ऋषि ने इंद्र और अहिल्या को श्राप दे दिया था। ऋषि ने श्राप मुक्ति के लिए इंद्र से गोमती के तटों पर 1001 शिवलिंगों की स्थापना कर तपस्या की, तब कहीं जाकर उनको ऋषि के श्राप से मुक्ति मिल सकी थी। उस समय इंद्र को तो श्राप से मुक्ति मिल गई, लेकिन अब गोमती में जलीय जीवों की हत्या, तटों पर की जा रही खेती से इस कदर घायल है कि वह एक नाले के रूप में तब्दील होकर रह गई है। गोमती को भी अब किसी ‘भगीरथ’ की दरकार है।
जिले में गोमती का 103 किमी का सफर
गोमती की यात्रा पीलीभीत जनपद के माधौटांडा कस्बे के पास (गोमत ताल) फुलहर झील से शुरू होती है। उद्गम स्थल से जनपद शाहजहांपुर, लखीमपुर, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, जौनपुर होते हुए 960 किमी का सफर तय करके वाराणसी में गोमती-गंगा मिलन होता हैं। शाहजहांपुर में गोमती नदी बंडा के गांव मानपुर के पास से प्रवेश करती है। इसके बाद नदी के घाट बंजारघाट, सुनासिरनाथ, मझरिया मोटे बाबा घाट, गुटैया घाट, पन्नघाट आदि हैं। शाहजहांपुर में मानपुर, इंदलपुर, ददिउरी, बिलंदपुर गौंटिया, गदाईसांडा, महमूदपुर सैंजनियां, नत्थापुर, औरंगाबाद सहित कई गांव पड़ते हैं। जिले में नदी कुल 103 किमी लंबी है।
यह है वर्तमान स्थिति
एक समय था जब गोमती नदी के किनारे सैकड़ों एकड़ जमीन पर पेड़ खड़े थे। धीरे-धीरे समय बदलता गया और गोमती के किनारों की हरियाली गायब होती गई। भू-माफिया ने नदी की जमीन पर कब्जा जमा लिया। इसके अलावा नदी में कूड़ा-करकट डालने से प्रदूषण भी तेजी से बढ़ा है। पड़ोस के खेतों में कीटनाशक का प्रयोग होने और इसका पानी नदी में आने से जलीय जंतु मरने के कारण नदी में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। नदी के तटों तक अवैध कब्जे कर खेती की जा रही है। गोमती की धार बंद होने का सबसे बड़ा कारण अवैध कब्जे ही हैँ। गोमती को सदानीरा बनाने में पीलीभीत में बरसाती नाला, शाहजहांपुर में झुकना, भैंसी, तरेउना आदि नदियों का खासा योगदान रहता है। भैंसी नदी भी कुछ वर्ष पूर्व सूख चुकी है। अवैध कब्जों के कारण झुकना, कठिना भी मृतप्राय: है।
नमामि गंगे प्रोजेक्ट में शामिल फिर भी दशा बदहाल
गंगा को अविरल बनाने के लिए कैबिनेट की ओर से नमामि गंगे कार्ययोजना को मंजूरी दी गई थी। नवंबर 2016 में इस योजना में गंगा की सहायक नदियां भी शामिल की गई थीं। परियोजना में उत्तर प्रदेश से केवल गोमती, गंडक और शारदा को ही शामिल किया गया था। गोमती, गंडक और शारदा का भी गंगा नदी की तरह विकास किया जाना था। गोमती से अवैध कब्जे हटाने, नदी में अपशिष्ट जाने से रोकने, पौधरोपण करने सहित तमाम काम होने थे, लेकिन अब तक गोमती के विकास के लिए कोई काम नहीं हो सका है।
वर्ष 2018 में डीएम ने शुरू किया था अभियान जो बाद में रुक गया
जन सहयोग से गोमती नदी की धारा को अविरल बनाने के लिए अप्रैल 2018 में तत्कालीन डीएम अमृत त्रिपाठी ने कहा था कि जन सहयोग से गोमती की सफाई होगी। गांव गुटैया में डीएम ने प्रधान, बीडीसी, संभ्रात नागरिकों की बैठक भी की थी। सिंचाई विभाग के तत्कालीन अधिशासी अभियंता उस्मान अली को नोडल अधिकारी भी बनाया गया था। निर्देश दिए गए थे कि एक माह में सर्वे करें और कितने स्थानों पर गाद जमा है, उसको चिह्नित कर मई 2018 से एक प्वाइंट से काम की शुरुआत कराएं। डीएम के तबादले के बाद से आज तक गोमती की धार को अविरल करने के लिए कोई काम ही नहीं किया गया है।
नदी की भूमि चिह्नित हो, मानव गतिविधियों पर लगे रोक
नदी की भूमि चिह्नित हो, इसे अतिक्रमणमुक्त कर वन शृंखला विकसित की जाए। इस क्षेत्र में मानव गतिविधियों पर भी रोक लगे। इससे न सिर्फ नदी सदानीरा बनेगी, बल्कि जैव विविधता को संरक्षण मिलेगा। इसके अलावा नदी क्षेत्र में बागवानी और प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। नदी के दोनों ओर दस किलोमीटर तक के तालाबों का पुनर्जीवन का कार्य आवश्यक है। इसमें कच्चे तालाबों की विशेष भूमिका है। ये सारे कार्य नमामि गंगे जैसी बड़ी योजनाओं में सूचीबद्ध हो सकते हैं। इन सरकारी योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में नदी पर कार्य कर रहे व्यक्तियों और संगठनों की सलाह और सहयोग लिया जाए। कार्यदायी संस्थाओं की समीक्षा हो। गोमती के तट क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ भूमि अवैध पट्टों के माध्यम से लोगों को हस्तांतरित कर दी गई है। चकबंदी के आसपास के अभिलेखों की जांच कर नदी भूमि चिन्हित की जाए और कब्जे हटवाएं जाएं।
- कुंवर नीरज सिंह, जल संरक्षण से जुड़े पर्यावरणविद्, राष्ट्रीय सह संपर्क प्रमुख लोकभारती, निवासी जेबां- पुवायां
तटीय किसान बंद कर रहे हैं नदी के स्त्रोत
गोमती नदी के किनारे के खेत स्वामी करहा लगाकर नदी के स्त्रोत बंद कर रहे हैं, इससे जलधार खत्म होती जा रही है। गोमती नदी के किनारे नाप होकर अवैध कब्जे हटवाए जाएं और उसी जगह पर वन विभाग की ओर से पौधरोपण कराया जाए। इससे गोमती नदी में पटान का काम बंद हो जाएगा और नदी की जलधार बेहतर होगी।
- आशुतोष मिश्र, निवासी जुझारपुर, पुवायां (दो वर्ष से अकेले ही गोमती नदी की सफाई में लगे स्वयंसेवक)
जमीन का चिह्नीकरण कर हटवाए जाएंगे कब्जे
मैंने बंडा और पुवायां क्षेत्र में गोमती नदी का निरीक्षण किया है। शिप्रा पाठक की पदयात्रा में भी शामिल हुआ हूं। गेहूं की फसल कटते ही गोमती नदी की जमीन का चिह्नीकरण कर अवैध कब्जे हटवाए जाएंगे। नदी के किनारे पौधरोपण कराया जाएगा। इसके लिए राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीमों का गठन किया जाएगा। अवैध कब्जों का पता लगाने के लिए पैमाइश शुरू होगी। पैमाइश के बाद कब्जे हटाकर सफाई कार्य, पौधरोपण आदि कराया जाएगा। गोमती को सदानीरा बनाने के हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
- हिमांशु उपाध्याय, एसडीएम पुवायां
नाले में तब्दील गोमती नदी और तट तक हो रही खेती (फाइल फोटो)। संवाद
नाले में तब्दील गोमती नदी और तट तक हो रही खेती (फाइल फोटो)। संवाद