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Shahjahanpur News: घरों में पानी घुसने से हजारों का नुकसान, फूट-फूट कर रोए लोग

Sat, 13 Jul 2024 04:35 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
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शाहजहांपुर। बाढ़ के पानी ने लोगों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। घर के अंदर पानी घुसने से गृहस्थी का सारा सामान नष्ट हो गया। वर्षों में संजोयी गृहस्थी डूबी देखकर लोग फूट-फूटकर रो पड़े।
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शहर में ऐसे भयावह हालात कभी नहीं बने। कई बार बाढ़ आई, मगर इतना पानी घरों में नहीं घुसा। बुधवार शाम से पानी घरों तक पहुंचना शुरू हुआ तब भी लोगों को यह अंदाजा नहीं था कि हालात ऐसे हो जाएंगे। लोगों के मकान के अंदर चार-चार फुट तक पानी पहुंच गया। गृहस्थी का सारा सामान डूब गया। इन्वर्टर, कंप्यूटर, फ्रिज, वाशिंग मशीन, आरओ सिस्टम जैसे महंगे आइटम खराब हो गए हैं। बाइक और कार भी डूब गई है। बाढ़ का पानी जाने के बाद उन्हें सही कराने में हजारों रुपये खर्च करने पड़ेेंगे। अधिकतर लोग पहनने के कुछ कपड़े और जेवर आदि लेकर मकानों से निकल आए हैं।
घर में रखे सारे कपड़े खराब हो चुके हैं। माना जा रहा है कि एक परिवार को कम से कम 50 हजार रुपये या उससे ज्यादा की क्षति हुई है। आवास विकास कॉलोनी में रहने वालीं एक महिला अपने सामने रोती नजर आई।
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खाली मकानों में चोरी की आशंका

बाढ़ के बाद लोग मकान छोड़कर चले गए। सारा सामान अंदर है। लोगों के सामने यह भी संकट है कि बाढ़ का पानी थोड़ा कम होने पर उनके मकानों में चोरी भी हो सकती है। उन्होंने पुलिस से मांग की है कि कॉलोनियों में गश्त की जाए वरना उनके ऊपर दोहरी मार पड़ सकती है।
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जहरीले कीड़े घरों में घुसे
बाढ़ के कारण पानी में जगह-जगह सांप-बिच्छू और जहरीले कीड़े तैर रहे हैं। ये लोगों के घरों में भी घुस गए हैं। लोग सांपों के कारण दहशत में हैं।

जीटीआई खाली कराया

बरेली मोड़ के आगे कांट रोड पर स्थित जीटीआई को खाली करा लिया गया। जीटीआई में वर्तमान में परीक्षाएं चल रहीं हैं। बाढ़ का पानी आने पर तमाम छात्राओं ने पहले ही हॉस्टल खाली कर दिया था। बृहस्पतिवार को शेष दो-तीन छात्राएं भी निकल गईं।
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रिश्तेदारी में नहीं मिली शरण, फंसे लोग
अधिकतर लोगों ने मकान छोड़ने के बाद शहर में रहने वाले अपने रिश्तेदारों और परिचितों के यहां शरण ली है। कई लोग ऐसे भी थे, जिनके शहर में रिश्तेदार ही नहीं रहते। इनमें से अधिकतर नौकरीपेशा लोग हैं। उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। एक व्यक्ति की रिश्तेदारी कटरा में है, मगर वहां भी जाने का कोई रास्ता नहीं था। उन्होंने मान-मनौव्वल कर अपने परिचित के यहां शरण ली। हालांकि, इस दौरान शहर के तमाम ऐसे लोग भी सामने आए, जिन्होंने अपने मकान के दरवाजे लोगों के लिए खोले।
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