खुटार। गांव दलीपपुर के भुइंहार बाबा स्थान पर चल रही भागवत कथा में कथा व्यास रोली त्रिवेदी ने कहा कि सच्ची भक्ति पर परमात्मा की कृपा होती है। भगवान की कथा सुनने से जीवों की व्यथा दूर होती है।
रोली त्रिवेदी ने परीक्षित जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि महाभारत के युद्ध में गुरु द्रोणाचार्य की मृत्यु से उनका पुत्र अश्वत्थामा अत्यंत क्रोधित हो गया। उसने पांडवों का वंश समाप्त करने का प्रण लिया। जब राजा परीक्षित माता के गर्भ में थे, उसी समय अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग परीक्षित की मां उत्तरा के गर्भ पर किया।
उत्तरा ने भगवान श्रीकृष्ण को पुकारा, तो भगवान ने उत्तरा के गर्भ की रक्षा की थी। ब्रह्मास्त्र का असर रहने से बालक मृत समान पैदा हुआ, यह जानकर भगवान श्रीकृष्ण ने शिशु को जीवित कर दिया। गर्भ में कठिन परीक्षा होने के कारण बालक परीक्षित नाम से प्रसिद्ध हुआ। कथा के बाद आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। कथा दस सितंबर तक होगी। 11 सितंबर को भंडारे का आयोजन किया जाएगा।