शाहजहांपुर। रामचंद्र मिशन थाना क्षेत्र के नुसरतपुर बाड़ीगांव में 2011 में हुई दो सगे भाइयों की हत्या के मामले में दो दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उन पर 43-43 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मुकदमे के सात आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। एक आरोपी की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी। एक आरोपी की फाइल किशोर न्यायालय भेजी गई है। यह आदेश जिला एवं सत्र न्यायाधीश भानुदेव शर्मा ने दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी शराफत उल्ला खां 20 मार्च, 2011 को अपने बेटे रिफाकत खां, नजाकत खां, फैसल खां और अपने साले एजाज खां के साथ ग्राम दिलावर भटकल स्थित खेत में सिंचाई कर रहे थे। सुबह करीब सवा नौ बजे गांव के मोहम्मद रजी आया और उन लोगों पर उसके खेत से ट्रैक्टर निकालने का आरोप लगाकर गालीगलौज करने लगा। विरोध करने पर रजी धमकी देकर चला गया। इसके बाद सुबह करीब दस बजे मो. रजी, मो. नबी, मो. वली, एक किशोर, अब्दुल उर्फ छोटे (सगे भाई), रिजवान, मो. रफी, जावेद, बबलू, यामीन, यासीन असलहे लेकर आ गए। ये लोग लाठी से शराफत को पीटने लगे। उसके बेटे और साला उन्हें बचाने के लिए दौड़े। हमलावरों ने नजाकत और फैसल को गोली मार दी।
उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने 11 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर अदालत में चार्जशीट दाखिल की। सत्र न्यायालय में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयान और जिला शासकीय अधिवक्ता अनुज कुमार सिंह के तर्कों को सुनने के बाद जिला जज ने मो. नबी और बबलू उर्फ आलम को दोषी माना। दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मो. वली की मौत मुकदमे के दौरान हो गई थी। नाबालिग की फाइल किशोर न्यायालय में भेज दी गई है। शेष आरोपियों को बरी कर दिया गया।