शाहजहांपुर। द्वितीय फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश नरेंद्रनाथ पांडेय ने गैर इरादतन हत्या के एक मुकदमे में दो सगे भाइयों समेत तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसी मुकदमे के एक आरोपी की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी।
जलालाबाद थाना क्षेत्र के गांव रघुनाथपुर निवासी इंद्रपाल ने तीन अक्तूबर 2005 को रिपोर्ट दर्ज कराकर बताया था कि गांव के सोनपाल और मेवाराम खेत खरीदने को लेकर उससे रंजिश मानते थे। तीन अक्तूबर की सुबह इंद्रपाल के पिता अंगद सरकारी नल से नहाकर लौट रहे थे तभी सुखदेव के घर के सामने सोनपाल, उसके सगे भाई रामलड़ैते, गांव के श्रीकृष्ण और सुखदेव ने उन्हें लाठियों से पीटना शुरू कर दिया। चीख-पुकार सुनकर इंद्रपाल और उनका भाई लालाराम मौके पर पहुंचे तो हमलावरों ने उन्हें भी पीटा। सोनपाल ने दांतों से इंद्रपाल की नाक काट ली। इलाज के दौरान उनके पिता की मृत्यु हो गई। पुलिस ने रामलड़ैते, सोनपाल, श्रीकृष्ण और सुखदेव के खिलाफ आरोप पत्र अदालत भेजा। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और सरकारी वकील उमेशचंद्र अग्निहोत्री के तर्क सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने रामलड़ैते, सोनपाल और श्रीकृष्ण को दोषी माना। तीनों को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया। आरोपी सुखदेव की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई थी। अदालत ने रामलड़ैते और श्रीकृष्ण पर 35,500 रुपये और सोनपाल पर 40,500 रुपये जुर्माना भी लगाया। अंगद के वारिसों को जुर्माने की कुल धनराशि में से 20 हजार रुपये बतौर क्षतिपूर्ति दिलाने का आदेश दिया।