शाहजहांपुर। दशम अपर सत्र न्यायाधीश पंकज कुमार श्रीवास्तव ने संपत्ति के विवाद में हुई हत्या के मुकदमे में तहेरे भाई समेत चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषियों को 13-13 हजार रुपये के जुर्माने से भी दंडित किया। इसी मुकदमे का एक आरोपी अब तक फरार है।
जलालाबाद क्षेत्र के गांव उदरापुर निवासी सुखवीर सिंह ने पुलिस को तहरीर दी थी कि 14 जून 2002 की रात आठ बजे वह अपने घर की चौपाल पर था। उसका भाई रनवीर सिंह खाना खा रहा था तभी उसके तहेरे भाई जयपाल, छोटे, नत्थू और बरीखास निवासी छेदा, छोटी झरहर निवासी पुक्कू घर में घुस आए। उसके तहेरे भाई चार साल से गांव से बाहर रह रहे थे। घर में घुसने के बाद उन लोगों ने उसकी मां से 50 हजार रुपये मांगे। मां ने रुपये न होने की बात कही तो वे लोग आगबबूला हो गए। हमलावरों ने घर में मौजूद सभी लोगों को कमरे में बंद कर दिया और सामान इकट्ठा करके आग लगा दी। सुखवीर निकलकर भाग गया। भागते समय रनवीर को छोटे ने गोली मार दी। रनवीर नत्थू के मकान के पास जाकर गिर गया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान अपर सत्र न्यायाधीश ने गवाहों के बयानात और सरकारी वकील श्रीपाल वर्मा के तर्क सुनने के बाद जयपाल सिंह, छेदा सिंह, पुक्कू और सर्वेश को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जयपाल, छेदा सिंह को आर्म्स एक्ट में तीन-तीन वर्ष के कारावास की सजा अलग से सुनाई गई। वारदात के बाद से ही छोटे व नत्थू फरार चल रहे हैं।