कुर्रिया कलां। क्षेत्र के 49 गांवों की आबादी को चिकित्सीय लाभ देने के उद्देश्य से बनी पीएचसी को खुद ही उपचार की जरूरत है। पीएचसी पर डॉक्टर और फार्मासिस्ट तक की नियुक्ति नहीं है। मुख्य गेट तक सड़क नहीं होने पर गर्भवती महिलाओं को प्रसव कराने के लिए गोद में उठाकर लाना पड़ता है। अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी संज्ञान नहीं लिया गया है।
कुर्रिया कलां गांव की पंद्रह हजार आबादी समेत आस-पास के करीब 49 गांवों के लिए पीएचसी का निर्माण कराया गया था। अस्पताल पर उपचार के नाम पर खानापूरी की जा रही है। डॉक्टर और फार्मासिस्ट नहीं होने से स्टाफ नर्स और वार्ड बाॅय के भरोसे अस्पताल चल रहा है। भवन के सामने तालाब जैसी स्थिति बनी हुई है। वहां मच्छर पनप रहे हैं।
भीषण गर्मी में पानी तक उपलब्ध नहीं है। एकमात्र हैंडपंप है। वह भी खराब पड़ा है। अस्पताल तक पक्की सड़क नहीं है। इस कारण जलभराव की स्थिति बनी रहती है। टीकाकरण कराने आने वाली गर्भवती महिलाओं व बच्चों को कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। प्रसव के समय महिलाओं को चारपाई या गोद में उठाकर अस्पताल लाना पड़ता है।
सुधार के लिए कई बार हुई शिकायत
-ग्राम प्रधान सुधांशु मिश्रा ने बताया कि कुछ समय पहले अस्पताल तक इंटरलॉकिंग का कार्य शुरू कराया गया था। वहां आसपास के लोगों ने विवाद करके रुकवा दिया था। सर्वोदय विकास समिति के सचिव विनय कुमार मिश्र ने बताया कि सीएमओ से पूर्व में कई बार लिखित रूप से डॉक्टर तैनात करने की मांग की। एक बार तीन दिन के लिए आयुर्वेदिक डॉक्टर भेज दिया। अब वही हालात बने हुए हैं।
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पीएचसी का निरीक्षण किया था। अव्यवस्थाओं में सुधार के लिए प्रयास करेंगे। प्रस्ताव बनाकर सीएमओ को देंगे। डॉक्टर की नियुक्ति के लिए भी प्रयास करेंगे।
डॉ.घनश्याम, नोडल अधिकारी-डिप्टी सीएमओ