तहसील बार एसोसिएशन के होली मिलन समारोह में कविता पाठ करते रामबाबू शुक्ल। संवाद
- बार एसोसिएशन की ओर से हुआ होली मिलन और हास्य कवि सम्मेलन
संवाद न्यूज एजेंसी
पुवायां। तहसील बार एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता सभागार में होली मिलन और कवि सम्मेलन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जयशंकर अवस्थी, महामंत्री प्रभाकर मिश्रा और कवि उर्मिलेश सौमित्र ने दीप जलाकर कर संयुक्त रूप से किया। कवि अरविंद पंडित ने सरस्वती वंदना कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया।
उर्मिलेश सौमित्र ने सुनाया- तिरंगे रंग के परचम पे हिंदुस्तान जिंदा है। वफाओं के इसी आलम पे हिंदुस्तान जिंदा है, पीढि़यां दुश्मनों की मिट गईं इसको मिटाने में, है कोई दम कि जिसकी दम पे हिंदुस्तान जिंदा है। कवि रामबाबू शुक्ला ने सुनाया-तीर तरकश में कम नहीं रखते, कम किसी से भी दम नहीं रखते। हम उपासक हैं शब्द साधक हैं, लेखनी रखते हैं हाथों में बम नहीं रखते। कवि प्रदीप वैरागी ने सुनाया, उनको तो हम जान बूझकर करते पीला लाल। जोगीरा सारा रा रा रा। कभी अरविंद पंडित ने कहा, जिसके दिल में किसी गैर की मोहब्बत हो, वो शाहजहां की मोहब्बत नहीं होती है।
इसके अलावा विमल यादव, हिमांशु मोहन, तेजपाल जोशी, मुनीश पांडे ने भी कविता पाठ किया। अध्यक्ष जयशंकर अवस्थी ने सभी का आभार जताया। संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता विमल श्रीवास्तव और कवि सम्मेलन का संचालन उर्मिलेश सौमित्र ने किया। इस मौके पर तमाम अधिवक्ता मौजूद रहे।