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भारत ने विश्व के सामने विकास का नया मॉडल रखा : डॉ. शाद

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एसएस कॉलेज में आयोजित सेमिनार में मौजूद लोग। संवाद
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- एसएस कॉलेज और लॉ कॉलेज की ओर से किया गया अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। एसएस कॉलेज के वाणिज्य संकाय और विधि महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में 80 शोध पत्र पढ़े गए। वक्ताओं ने विश्व के सामने भारत की भूमिका पर अपने विचार प्रकट किए।
सेमिनार का उद्घाटन नेपाल के डॉ. विशेश्वर आचार्य और ओमान के डॉ. शाद अहमद खान ने स्वामी शुकदेवानन्द सरस्वती तथा डॉ. भीमराव आंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजली और दीप जलाकर किया। विधि महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जेएस ओझा ने स्वागत संबोधन दिया। डॉ. कविता भटनागर और संगीत विभाग की छात्राओं ने सरस्वती वंदना तथा वंदेमातरम प्रस्तुत किया।
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मुख्य वक्ता बुरैमी विश्वविद्यालय, ओमान के डॉ. शाद अहमद खान ने कहा कि जी-20 की अध्यक्षता करते हुए भारत ने विश्व के सामने विकास का एक नया मॉडल रखा है। इसमें संसाधनों का कम से कम विदोहन करते हुए लचीले और सतत विकास की व्यवस्था है। बदायूं से आए विशिष्ट अतिथि केंद्र सरकार के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड से सेवानिवृत्त डॉ. रामस्वरूप सिंह ने कहा कि सतत विकास के लिए पर्यावरण की सुरक्षा, मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा और भूमि की उपजाऊ शक्ति की सुरक्षा पर ध्यान देना आवश्यक है। मुख्य अतिथि नेपाल की नोबल एकेडमी के अध्यक्ष डॉ. विशेश्वर आचार्य ने कहा कि देशों के बीच कौशल विकास तकनीकियों का आदान-प्रदान किया जाना आवश्यक है। उद्घाटन सत्र में संयोजन सचिव प्रो. अनुराग अग्रवाल ने कहा कि जी-20 देशों का नेतृत्व करते हुए भारत ने सामाजिक समावेशन को आर्थिक विकास का आधार बनाया है। महाविद्यालय के सचिव डॉ. एके मिश्रा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि जी-20 देशों की धारणा को डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अपने पहले शोधपत्र में ही स्पष्ट कर दिया था। इससे उनकी दूरदर्शिता प्रदर्शित होती है। बृजलाली के संचालन में हुए कार्यक्रम के अंत में एसएस महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आरके आजाद ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
उद्घाटन सत्र के बाद चार तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. आशुतोष प्रिय, डीएन पीजी कॉलेज, मेरठ के वाणिज्य विभागाध्यक्ष प्रो. एसके शर्मा, किरोरीमल कॉलेज, नई दिल्ली के प्रो. पीके सूर्या और रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली की प्रो. रुचि द्विवेदी ने तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता की। प्रथम सत्र में 11, द्वितीय सत्र में 18, तृतीय सत्र में 24 और चतुर्थ सत्र में 27 शोध पत्र पढ़े गए।
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नेपाल से आए डॉ. सिया लामिक्षाने, प्रो. राजकुमार सिंह, प्रो. एसके यादव, डॉ. आलोक दीक्षित, डॉ. राजीव अग्रवाल, डॉ. देवेंद्र सिंह, डॉ. श्रवण कुमार सिंह, जागृति गुप्ता, डॉ. पुनीत मनीषी, डॉ. आशीष गोयल, डॉ. जगदीश कुमार, डॉ. विकास अग्रवाल, डॉ. शिशीर शुक्ला, डॉ. विजय अग्रवाल, डॉ. पदमजा मिश्रा, डॉ. बरखा सक्सेना, व्याख्या सक्सेना, डॉ. धर्मवीर सिंह, डॉ. अभिषेक वाजपेयी, डॉ. रुचि शुक्ला आदि उपस्थित थे।

एसएस कॉलेज में आयोजित सेमिनार में मौजूद लोग। संवाद

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