शाहजहांपुर। गर्रा और खन्नौत नदियों के डूब क्षेत्र में प्रशासन की नाक के नीचे अवैध निर्माण होने का सिलसिला बरसों से जारी है। हर बार नोटिस जारी करके अफसर भूल जाते हैं और अवैध निर्माण कुछ समय रुककर फिर उसी तेजी से शुरू हो जाते हैं। दो साल पहले 250 नोटिस जारी करने के बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई। नया मामला नगर निगम कर्मचारी के बरातघर का है। डूब क्षेत्र में निर्माण की सूचना पर सिटी मजिस्ट्रेट ने मौका मुआयना कर रोजा पुलिस से निर्माण रुकवा दिया। इसे ध्वस्त कराने की कवायद के साथ ही ऐसे और निर्माणों पर बुलडोजर चलाने का दावा नए सिटी मजिस्ट्रेट कर रहे हैं।
नगर निगम के कर्मचारी के जिस भूखंड पर मैरिज लॉन का निर्माण कार्य रोका गया है, उसने यह जमीन कई वर्ष पहले खरीदी थी। विनियमित क्षेत्र कार्यालय के अनुसार इसी भूखंड पर निर्माण शुरू होने पर वर्ष 2020 में कर्मचारी की पत्नी को नोटिस जारी कर अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए थे। बाद में खुच वजहों से अधिकारी इस ओर से उदासीन हुए तो फिर से निर्माण शुरू कर दिया गया। अब इस मामले की पुरानी पत्रावली खोजकर अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण की तैयारी की जा रही है।
जिक्र कर दें कि दो दशक पहले जिले की तत्कालीन महायोजना में लोधीपुर के खन्नौत पुल से लेकर सूफी संत हजरत बूलनशाह मियां की दरगाह तक नदी के किनारे 119 गाटा नंबरों की जमीनों को डूब क्षेत्र के तहत माना गया था। प्रशासन की अनदेखी से वहां अब दर्जनों पक्के मकान और दुकानें बना लीं गईं। एक दशक पहले डीएम रहे नवदीप रिणवा ने अवैध निर्माण रोकने के लिए रात में खन्नौत नदी के तटवर्ती क्षेत्र पर नजर रखने के निर्देश दिए थे पर संबंधित अधिकारी दिन में भी आंखें मूंदे रहे। अधिकांश गाटा नंबर अवैध कब्जों से घिर गए।
नोटिस जारी होने के बाद नहीं हुई कोई कार्रवाई
खन्नौत नदी के डूब क्षेत्रों में मकान बनाने के लिए शहर के लोगों ने जिन किसानों से जमीनें खरीदीं, उन्होंने भी ऐसी जमीनों का राजस्व न्यायालयों से अधिकृत तौर पर उप विभाजन नहीं कराया। लोधीपुर में खन्नौत पुल के पास जमीन पर कब्जा कर एक राजनैतिक दल की पदाधिकारी को वहां मकान और दुकानें बनाने पर विनियमित क्षेत्र के तत्कालीन प्राधिकारी के स्तर से नोटिस जारी किया गया। करीब तीन वर्ष पहले तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट ने अवैध निर्माण करने पर करीब 250 लोगों को नोटिस जारी किए। इन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, उल्टा इस संख्या से ज्यादा नए मकान-दुकान इसी क्षेत्र में बना लिए गए।
इंदिरानगर में फ्लड जोन के मानक हवा में उड़ाए
करीब तीन दशक पहले इंदिरानगर कॉलोनी फ्लड जोन के मानकों को अनदेखा करके खन्नौत के बिल्कुल किनारे तटबंध के पास विकसित हो गई। अब इसी कॉलोनी में कई प्रभावशाली लोगों के आवास बने हैं। इसलिए कॉलोनी की वैधता को लेकर सरकारी सिस्टम भी कोई सवाल खड़े नहीं करता। एक दशक पहले खन्नौत में आई बाढ़ के दौरान कॉलोनी के तमाम मकान कई दिन तक पानी से घिरे रहे।
विनियमित क्षेत्र के स्तर से तमाम लोगों को नोटिस देकर उनके निर्माण कार्य रुकवाए गए हैं। नियमों का उल्लंघन होते पाए जाने पर विधिक कार्रवाई भी हो चुकी है। नगर निगम के कर्मचारी को पहले नोटिस जारी हो चुका है। अब उसके निर्माण कार्य को ध्वस्त कराने की कार्रवाई की जाएगी। नदी के आसपास की जमीनों पर हुए अन्य अवैध निर्माण कार्यों की भी जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - आशीष कुमार सिंह, नियत प्राधिकारी (विनियमित क्षेत्र)/सिटी मजिस्ट्रेट