शाहजहांपुर। पहाड़ों पर हो रही बारिश और उत्तराखंड के बांधों-बैराजों से अतिरिक्त पानी की निकासी जारी रहने से कलान के भैंसार बांध पर रविवार सुबह गंगा में फिर उफान आ गया। बीते 24 घंंटों के दौरान गंगा का जलस्तर 20 सेमी बढ़ गया।
हालांकि, तिलहर से लेकर जलालाबाद तक रामगंगा और शहर में गर्रा व खन्नौत नदियां उतार पर हैं, लेकिन तमाम तटीय गांवों समेत शहर के निचले इलाकों में जलभराव से बाढ़ से जुड़ी दुश्वारियां कम नहीं हो रहीं।
शनिवार की तुलना में रविवार को रामगंगा के जलस्तर मेें 24 सेमी की कमी आई तो गर्रा 55 सेमी कम होने के बावजूद खतरे के निशान से सिर्फ पांच सेमी नीचे बह रही है। इसी तरह खन्नौत के जलस्तर में 50 सेमी कमी आई है, लेकिन रविवार को भी सुबह से दोपहर बाद तक नदी का बहाव खतरे के निशान तक बना रहा।
रामगंगा के जलस्तर में गिरावट आने के साथ तिलहर से जलालाबाद तक और परौर से अल्हागंज तक कई तटीय गांवों के पास भूमि कटान बढ़ गया है।
सिंचाई विभाग शारदा नहर खंड के बाढ़ नियंत्रण कक्ष को उत्तराखंड के कई बांधों और बैराजों से मिलीं सूचनाओं के अनुसार सभी स्थानों से नदियों में छोड़े जा रहे पानी की मात्रा कम हो रही है। नियंत्रण कक्ष से बताया गया कि नरौरा बैराज से आज गंगा में 30986 क्यूसेक पानी निकाला गया, जो बीते दिन से 6529 क्यूसेक कम है। इसी तरह खो, हरेली, किच्छा, रामनगर आदि से रामगंगा में पानी की निकासी 3205 क्यूसेक से घटकर 10666 क्यूसेक हो गई।
ड्यूनी डाम से गर्रा में पानी की निकासी बीते 24 घंटे से 4042 क्यूसेक स्थिर है। इसके बावजूद नदियों में जो पानी पीछे से आ रहा है, वह बाढ़ प्रभावित कई गांवों से लेकर उनके संपर्क मार्गों से हट नहीं रहा है।
खास यह है कि जिले में जलालाबाद व कलान तहसील से निकली गंगा में पानी बदायूं के कछला घाट होकर यहां आता है। दो दिन पहले वहां भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है। इसीलिए यहां भी गंगा में पानी बढ़ा।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुनील कुमार भास्कर के अनुसार कछला घाट पर जलस्तर तेजी से घट रहा है। उनका कहना है कि बांधों और बैराजों से निकलने वाले पानी की मात्रा कम होने की सूचनाएं मिलने के मद्देनजर गंगा समेत जिले की सभी नदियों में जलस्तर में अब लगातार कमी आने की संभावना है।
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नदियों का जलस्तर (मीटर गेज में) : एक नजर
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नदी खतरे का निशान मौजूदा जलस्तर जलस्तर में वृद्धि/कमी
गंगा 143.65 142.20 + 0.20
रामगंगा 161.50 159.85 _ 0.24
गर्रा 148.80 148.75 _ 0.55
खन्नौत 145.75 145.75 _ 0.50
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फोटो - 26
नारायणनगर के पास कट रहे उपजाऊ खेत
परौर। रामगंगा के जलस्तर में कमी आने के साथ क्षेत्र के तटवर्ती गांवों में कृषि योग्य जमीनों का कटान तेज हो जाने से क्षेत्र के किसान बहुत परेशान हैं। नारायणनगर गांव के पास कई किसानों के उपजाऊ खेत कटकर बाढ़ की लहरों में बह गए।
गत एक दशक मेें रामगंगा की बाढ़ से सैकड़ों किसानों की हजारों बीघा जमीनें कटने से वह सभी ठिकाने रेतीले हो चुके हैं। इस बार भी नदी उतार पर होने के साथ फिर कटान होने लगा है। नारायणनगर के अलावा मोहनपुर, बिचपुरी, मंझा और दहेलिया में भी मूंगफली, मक्का, धान आदि की तैयार हो रहीं फसलों समेत जमीनें कट रही हैं, लेकिन भूमि कटान की आपदा के सामने किसान असहाय बने हुए हैं।
रामगंगा भूमि कटान करते हुए इन गांवों की ओर बढ़ रही है। इससे ग्रामीण अपनी जान-माल की सुरक्षा की चिंता में डूबे हैं। सिंचाई विभाग ने कटान रोकने के लिए दो वर्ष पहले जिओ ट्यूब की ठाेकरें बनवाई थीं, लेकिन बाढ़ के तेज बहाव के दौरान जिओ ट्यूब अपने स्थान से हटकर इधर-उधर खिसक गए हैं। नारायन नगर निवासी रामनिवास कुशवाहा, रामविलास, जगपाल कश्यप आदि ने कटान रोकने को कारगर प्रयास करने की मांग की है। संवाद
कुर्रियाकलां क्षेत्र में फसलें जलमग्न, भीग गया भूसा-चारा
कुर्रिया कलां। गर्रा नदी में आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र के तमाम गांवों में किसानों को डूबी फसलें खराब होने की आशंका है। यही नहीं, भूसा भीग जाने से अपने एवं पशुओं को रहने एवं खिलाने का संकट खड़ा हो गया है।
सरथौली, रत्नापुर, बहरी कुर्रिया, कौढा, पल्हौरा, इमलिया आदि गांवों के किसानों के सामने अपनी धान की रोपाई, धान की लगी फसल, गन्ना और हरा चारा की सिंचाई कर उसे बचाने का संकट भी है। विद्युत उपकेंद्र परिसर में भरा बाढ़ का पानी निकल नहीं पाने से क्षेत्र के दो दर्जन गांवों में बत्ती गुल है।
जेई के अनुसार स्थिति सामान्य होने में कम से कम एक सप्ताह का समय लगेगा। कई जगह बिजली के खंभे गिर गए हैं। पानी कम होने पर ही नये खंभे लगवाना सम्भव होगा। गांंव के अंकित मिश्रा ने बताया कि खेतों में लगी दस एकड़ धान की फसल कुछ दिन से बारिश न होने से पीली पड़ने लगी है।
इस वजह से खेतों में लगे सबमर्सिबल भी ठप पड़े हैं। अब ऐसे में किसानों की एक मात्र आस क्षेत्र से निकली शारदा नहर से बची है, लेकिन उसमें पर्याप्त पानी नहीं है। इस कारण खेतों की तरफ लगे कुलाबे सूखे पड़े हैं। रथौली गांव के किसान भानु प्रताप सिंह का कहना है कि नहर में पानी नहीं आने पर फसलें बचाना कठिन होगा। संवाद
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पानी कम होते ही दिखने लगी फसलों की बरबादी
सेहरामऊ दक्षिणी। गर्रा व खन्नौत नदी बाढ़ के बाद पानी कम होने के साथ तहसील सदर क्षेत्र के दर्जनों गांवों में तबाही के मंजर के साथ फसलों की बरबादी दिखने लगी है। गांव कांकर, कैलहा, बरेंग, गुर्रा भमौली, खिरियाहीर, लिलथरा, पंथी, पंचौली, सरौरा, कुतुआपुर, मोहद्दीनपुर, मियांपुर गौंटिया, लक्ष्मणपुर, दिवैयापुर, चंदगोई , चांदापुर, सिसनई, रौरा बांगर, इटौरा, दुधौना, सुजातपुर, उटहा, देवकली, मंसूरपुर आदि गांवों के खेतों में लाखों रुपये की लागत से उगाई गई धान, उड़द, तिल, भिंडी, तोरई, लौकी, कद्दू, अरबी, करेला, खीरा, गन्ना आदि की फसलें खराब हो गईं हैं। पशुओं के लिए खेत में खड़ी ज्वार के साथ बरसीम और घास भी नष्ट हो गई है। इस कारण किसानों को पशुओं की भूख मिटाने को भूसा-चारा को भटकना पड़ रहा है। संवाद
बाढ़ प्रभावित गांवों में नाव से हो रहा आवागमन
जलालाबाद। नदियों के तटवर्ती गांवों तक दस्तक देकर लोगों की धड़कनें बढ़ा चुकी बाढ़ में कमी आने के बावजूद कई गांवों तक जाने वाले रास्ते कट जाने या फिर विभिन्न जगहों पर जलभराव से आवागमन बाधित है। तिकोला पुल के आगे और गांव कसारी में बाढ़ के पानी से कटे रास्तों पर रविवार को भी नाव से ही आवागमन होता रहा। रामगंगा में पानी घटने के बाद प्रभावित गांवों में बीमारियां फैलने से रोकने को तहसीलदार पैगाम हैदर ने रविवार को स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट करते हुए संबंधितों को लगातार गांवों में कैम्प लगाकर मरीजों की जांच व दवा वितरण कराने के निर्देश दिए हैं। अल्हागंज क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित वजीरपुर, भरतौली आदि गांव का दौरा कर लौटने पर बताया कि पानी काफी कम हो गया है, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। संवाद
सेहरामऊ दक्षिणी में जलमग्न हुई फसल। संवाद