गांव नाहिल में गणेशोत्सव होने के बाद बुधवार को प्रथम पूज्य भगवान गणेश को शोभायात्रा निकालकर विदाई दी गई। गांव के सरस्वती विद्या मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई थी। छह दिन तक पूजा अर्चना और कथा का आयोजन किया गया। इस दौरान धर्माचार्यों ने लोगों को भगवान गणेश की उत्पत्ति और उनकी लीला की कथा सुनाई। बुधवार सुबह से ही गांव के अलावा आसपास के कई गांवों के लोग भी भगवान गणेश की प्रतिमा विसर्जन से पूर्व निकाली जाने वाली शोभायात्रा में शामिल होने के लिए स्कूल परिसर में आ पहुंचे। ढोल नगाड़ों की धुन के साथ और रंग गुलाल उड़ाते भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा और कई झांकियों के साथ खन्नौत नदी के बहेड़ा घाट को रवाना हुए। इस दौरान गांव में 21 मटकी फोड़ने के कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। काफी ऊंचाई पर बंधी मटकियों को गांव के युवाओं की टीम ने फोड़ कर पुरस्कार प्राप्त किया। शोभायात्रा का गांव के अलावा रास्ते में पड़ने वाले गांवों में पुष्प बरसाकर भव्य स्वागत किया गया। दोपहर बाद खन्नौत नदी में गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन कर दिया गया।