शाहजहांपुर। बरसात होने से भले ही लोगों को गर्मी से राहत न मिली हो लेकिन मानसूनी सीजन ने लोगों के कानों पर काफी प्रभाव डाला है। इस समय लोगों के कानों में संक्रमण हो रहा है। कानों में फंगस लगने से लोगों के सुनने की क्षमता पर फर्क पड़ा है, कान में दर्द भी होता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में कान में फंगस के रोज 35 से 40 मरीज पहुंच रहे हैं।
बारिश के मौसम में उमस बढ़ने से कान में संक्रमण के मामलों में इजाफा हुआ है। अधिक गर्मी या उमस के कारण कानों में नमी बन जाती है। इसके चलते कानों में खुजली होने लगती है। ऐसे में लोग माचिस की तीली डालकर सफाई करते हैं, या फिर कानों में गर्म तेल डालकर राहत पाने का प्रयास करते हैं। डॉक्टरों की मानें तो तीली डालने से कान में घाव होने से संक्रमण बन जाता है। इसमें फंगस (फफूंद) लग जाती है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में कान के फंगस के मरीज इस समय अधिक पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि फफूंद के चलते कान में असहनीय दर्द, कान का बहने लगना, जख्म होना आम बात है। ये दिक्कत आने पर तुरंत ही डॉक्टर से संपर्क करें।
यह भी है संक्रमण के कारण
कानों में छेद होने पर फंगस लगने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। जबकि स्वस्थ कानों में भी पानी या शैंपू जाने पर यह दिक्कत होने की संभावना बनी रहती है। इसके अलावा कान में चोट लगने, शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी फंगस का कारण बन सकता है।
ये बरतें सावधानी
कानों में खुजली होने पर माचिस की तीली आदि डालकर सफाई न करें।
कान को साफ रखें, नहाते समय कान में पानी या शैंपू आदि न जाने पाए।
कान के बहने पर घरेलू नुख्से इस्तेमाल करने के बजाय डाक्टर को दिखाएं।
बाहर कान की सफाई बिल्कुल नहीं कराएं, एक ही सलाई का इस्तेमाल से नुकसान हो सकता है।
नियमित तौर पर कान की सफाई रखें, नहाते समय विशेष सावधानी को बरतें।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में हर दिन 200 से 250 कान के रोगी पहुंच रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा कान में फंगस के रोगी हैं। बारिश और उमस के कारण फफूद आने की दिक्कत हो रही है। कानों में पानी जान से बचाएं। कानों में दिक्कत होने पर तुरंत ही डॉक्टर को दिखाएं। - डॉ. पूनम ओमर, ईएनटी विभाग, राजकीय मेडिकल कॉलेज