पर्दा प्रथा शहर से भले ही गायब हो गई हो, लेकिन ग्रामीण परिवेश में आज भी खुलेपन का रिवाज नहीं है। मतदान के दिन जब गांवों में जाने का मौका मिला तो टोलियों में घूंघट डाले महिलाएं वोट डालने को जाती दिखीं। पुवायां के कई गांवों में यह दृश्य दिखे। गरमी में भी दुल्हन की तरह सजीं संवरी महिलाएं लंबा सा घूंघट, शाल, लाल कलर के मोजे और उसके ऊपर पायजेब की रुनझुन करती सधी चाल, कौतूहल पैदा कर रही थी। जब बूथ पर वह मतदान करने गईं तो भी उन्होंने घूंघट की आड़ से ही मतपत्र लेकर अपने मनपसंद प्रत्याशी को वोट डाला। महिलाएं बमुश्किल बात करने को तैयार हुईं। जब उनसे पूछा गया कि वोट किसके कहने पर डाला तो जवाब मिला कि अपने मन से। उधर, कई वृद्ध महिलाओं ने भी परिवार के लोगों के सहारे बूथ पर पहुंचकर वोट डाला।