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डॉक्टर उपलब्ध कराने के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह पकड़ा गया

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शाहजहांपुर में गिरफ्तार ठग गिरोह के लोग।
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फोटो नंबर 12
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डॉक्टर उपलब्ध कराने के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह पकड़ा गया
सदर बाजार पुलिस ने लखीमपुर के पांच आरोपियों को किया गिरफ्तार, फर्जी डिग्री, शपथ पत्र, आधार कार्ड बरामद
नसिंग होम, पैथोलॉजी सेंटर और अल्ट्रासाउंड सेंटरों में डॉक्टर उपलब्ध कराने के नाम पर करते थे ठगी
आसपास के जिलों तक फैला है नेटवर्क
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। सदर थाने की पुलिस ने बुधवार को ऐसे गिरोह को दबोचा, जो नर्सिंग होम, पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटर से डॉक्टर उपलब्ध कराने के नाम पर ठगी करता था। लखीमपुर के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से मेडिकल की फर्जी डिग्री, आधार कार्ड, शपथ पत्र आदि बरामद किए हैं। आरोपियों ने बताया कि कई सेंटर उनके द्वारा उपलब्ध कराई गईं डिग्री पर चल रहे हैं।
मोहल्ला गदियाना निवासी शमीम हसन खां ने 30 अक्तूबर को लखीमपुर निवासी महेंद्र श्रीवास्तव पर डॉक्टर उपलब्ध कराने के नाम पर तीन लाख रुपये ठगने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था। मंगलवार रात शमीम की सूचना पर रोडवेज बस स्टैंड के पास से पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से 11 फर्जी मेडिकल डिग्री, शपथ पत्र व आधार कार्ड, आठ पेज कूटरचित मेडिकल की विभिन्न विश्वविद्यालयों की डिग्री, 47 मेडिकल प्रपत्र, लैपटॉप आदि बरामद हुए।
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एसपी एस. आनंद ने बताया कि पुलिस ने लखीमपुर खीरी के थाना कोतवाली के द्वारिकापुरी कांशीराम आवास निवासी महेंद्र श्रीवास्तव, जीतेश श्रीवास्तव, गोकुलपुरी गढ़ी रोड निवासी गोपाल गुप्ता, थाना पसगवां के ग्राम सिसोरा नासिर निवासी मोहम्मद आजम व लघुंचा निवासी राजकुमार सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद उनसे कड़ाई से पूछताछ की। इसके बाद आरोपियों ने सारे राज उगल दिए।
नकली को असली डिग्री बताकर तीन खातों में ट्रांसफर कराते थे रुपये
एसपी एस. आनंद ने बताया कि आरोपी अल्ट्रासाउंड सेंटर, पैथोलॉजी सेंटर पर जाकर डॉक्टर के फर्जी कागजात दिखाते थे। फिर फर्जी डॉक्टर से बात कराकर संचालक से रुपये तय कर लेते थे। धनराशि को जीतेश श्रीवास्तव, गोपाल गुप्ता के खातों में ट्रांसफर कराते थे। रुपये खाते में आने के बाद फोन उठाना ही बंद कर देते थे।
ऐसे तैयार करते थे फर्जी प्रमाण पत्र
आरोपी मेडिकल काउंसिल की वेबसाइट पर पांच अंकों का नंबर डालकर सर्च कर डॉक्टर की डिग्री का विवरण डाउनलोड कर लेते थे। उसी के आधार पर फर्जी मेडिकल डिग्री, आधार कार्ड, शपथ पत्र व अन्य प्रपत्र तैयार कर ठगी करने में इस्तेमाल करते थे।
डी-फार्मा कर चुका है गोपाल, डॉक्टर बन करता था वीडियो काल
गिरोह का सदस्य गोपाल गुप्ता डी-फार्मा करने के साथ ही डॉक्टरी पेशे के बारे में जानकारी रखता था। आजम भी कई अस्पतालों में काम कर चुका है। महेंद्र लोगों से संपर्क करता था। फिर गोपाल, राजकुमार और मोहम्मद आजम को डॉक्टर बताकर वीडियो काल पर बात कराता था। डॉक्टरी पेशे की जानकारी होने के कारण सेंटर संचालक इनके झांसे में आ जाते। सीओ सिटी अखंड प्रताप सिंह ने बताया कि जीतेश कुमार कंप्यूटर का अच्छा जानकार होने के कारण फर्जी कागजात व आधार कार्ड तैयार कर फर्जी नोटरी कराता था। इसके बाद आसपास के जिलों में डायग्नोस्टिक व अल्ट्रासाउंड सेंटर चलाने वालों को डॉक्टर उपलब्ध कराने के नाम कागजात देते थे।
नर्सिग होम और पैथोलॉजी संचालक डिग्री लेकर डॉक्टर नियुक्त न कर टेक्नीशियन आदि से जांच कराते हैं। इससे मरीज की रिपोर्ट भी सही न आने की आशंका रहती है। ऐसे ही फर्जी मेडिकल प्रपत्र बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश पुलिस ने किया है।
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- एस. आनंद, एसपी
शाहजहांपुर समेत कई जिलों में चल
रहे फर्जी कागजात पर सेंटर
ग्राहकों को तलाश कर लाने का काम महेंद्र श्रीवास्तव करता था। ग्राहक से फोन पर बात भी वही करता था। आरोपियों ने स्वीकार किया कि उस्मान अल्ट्रासाउंड क्लीनिक पिहानी हरदोई, हिंद डायग्नोस्टिक सेंटर धौरहरा (खीरी), सिद्धि विनायक डायग्नोस्टिक सेंटर, स्वास्तिक डायग्नोस्टिक सेंटर व सहज हॉस्पिटल बंडा (शाहजहांपुर), हरिओम डायग्नोस्टिक सेंटर ढकिलवा (लखीमपुर खीरी), आरोग्यम डायग्नोस्टिक सेंटर आवास विकास, लखीमपुर खीरी, सिटी डायग्नोस्टिक सेंटर मोहम्मदी (खीरी), वेलकेयर डायग्नोस्टिक सेंटर कपूरथला रोड लखीमपुर, पं. राजेंद्र प्रसाद स्मारक कॉलेज ऑफ फार्मेसी/डायग्नोस्टिकसेंटर/ट्रामासेंटर सेहरामऊ उत्तरी (पीलीभीत), कृष्णा डायग्नोस्टिक सेंटर बिलसंडा (पीलीभीत) आदि में डॉक्टर उपलब्ध कराने के नाम पर फर्जी मेडिकल डिग्रियां देकर रुपये लिए थे। उनके द्वारा उपलब्ध कराए फर्जी मेडिकल प्रपत्रों से आसपास के कई जिलों में सेंटरों का संचालन हो रहा था। आरोपियों ने बताया कि गदियाना निवासी डॉ. शमीम खां से तीन लाख रुपये लेकर डॉ. रोहित गुरनानी के फर्जी कागजात देकर डेढ़ लाख रुपये लिए थे, जबकि शेष रुपये बाकी थे।
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