लखन वर्मा का फाइल फोटो। स्रोत : परिजन
तिलहर। बारात जाने से चार घंटे पहले थाना क्षेत्र के गांव खनपुरा निवासी लखन वर्मा (26) ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। चर्चा हैं कि मंगेतर से किसी बात को लेकर विवाद होने के चलते उसने जान दे दी। जीआरपी ने शव के टुकड़ों को कई किलोमीटर क्षेत्र से एकत्रित कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
रेलवे में ट्रेन मैनेजर पद पर तैनात श्रीराम वर्मा के पुत्र लखन वर्मा की बदायूं जिले के उझानी क्षेत्र के गांव भवानीपुर में रमेश चंद्र वर्मा की बेटी प्रभा वर्मा के साथ शादी तय हुई थी। बृहस्पतिवार को बरात जानी थी। करीब एक बजे लखन घर से निकला था। कुछ देर बाद उसकी मौत की सूचना पर खुशियां मातम में बदल गई। पिता श्रीराम वर्मा ने बताया कि तीन पुत्रों में लखन मझला बेटा था। उसने वरुण अर्जुन मेडिकल कॉलेज से नर्सिंग का कोर्स किया था। पढ़ाई करते समय एक लड़की से प्रेम-प्रसंग हो गया। बुधवार को तिलक चढ़ाने की रस्म हुई। इसमें लड़की वालों की ओर से कार व अन्य सामान भी दिया गया। बरात जाने से चार घंटे पहले लखन घर से चला गया। परिजन भी उसकी मौत की वजह स्पष्ट नहीं बता पा रहे हैं।
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दूर तक बिखर गए टुकड़े, सीमा विवाद में उलझी पुलिस
-युवक के ट्रेन से कटने की खबर पर तिलहर पुलिस पहुंचीं। सीमा विवाद के चलते शाहजहांपुर जीआरपी से एसआई रजनीश कुमार शुक्ला भी मौके पर पहुंचे और क्षत-विक्षत शव को रेलवे ट्रैक से हटवाकर ट्रैक सुचारू कराया। स्टेशन मास्टर ने बताया कि युवक के शरीर के टुकड़े दूर तक बिखरे बरामद हुए। उसका सिर इंजन के पहिये में फंसा चला गया। उसे कटरा रेलवे स्टेशन में ट्रेन को रोककर निकाला गया। घटना रेल यार्ड के भीतर होने के चलते जीआरपी ने शव को पोस्टमार्टम को भेजा है। इस बीच अप लाइन पर आने वाली जननायक ट्रेन को काशन देकर आगे बढ़ाया गया। एक मालगाड़ी को यार्ड में रोका गया।
लखन पहले भी रेल ट्रैक पर जा चुका है
-लखन दो बार पहले भी रेलवे ट्रैक पर कटने के लिए जा चुका है। लेकिन परिजनों ने उसे बचा लिया था। उनके रिश्तेदार मुकेश ने बताया कि होली के दिन भी लखन रेल पटरी पर बैठकर अपनी मंगेतर से बात कर रहा था। सूचना मिलने पर उसे बचाया था।
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मंगेतर के साथ विवाद की हो रही चर्चा
-जिस मंगेतर के साथ लखन भांवर के फेरे लेने की तैयारी कर रहा था। उसी से विवाद की चर्चा जोरों पर है। परिजन भी मौत को लेकर कुछ नहीं बता पा रहे हैं। उसकी मौत से शादी वाले घर में मातम छाया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।