कोलाघाट पुल से निकलते लोडेड ट्रक। संवाद
जलालाबाद/मिर्जापुर। करीब तीन साल पहले पिलर धंसने से क्षतिग्रस्त हुए कोलाघाट पुल पर शनिवार को पहली बार गिट्टी से भरे 28-28 टन वजनी चार ट्रक पुल के एक छोर से दूसरे छोर तक दौड़ाए गए। बीएचयू से संबद्ध आईआईटी के विशेषज्ञों की टीम ने पुल के सभी पिलर की भार वहन क्षमता का आकलन किया। अभी तीन पिलर की अलग-अलग भार वहन क्षमता की जांच सहित अन्य कई कार्य अभी शेष हैं।
1800 मीटर लंबा पुल 61 पिलर पर बनाया गया था। नवंबर 2021 में पुल टूट जाने पर उस हिस्से का पुनर्निर्माण होने पर सेतु निगम ने पुल को मजबूती देने के लिए वहां एक पिलर बढ़ा दिया था। इस तरह पुल के 62 पिलर की भार वहन क्षमता जांची जानी है। पुल के बीच वाले हिस्से के तीन पिलर बाढ़ में डूबे हैं। इससे उनकी जांच का काम रोक दिया गया था। इसी जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए आईआईटी की टीम ने शनिवार को पुल के दोनों छोर से दो-दो ट्रक कई बार दौड़ाकर सभी पिलर की मजबूती परखी। पुल पर ट्रक दौड़ाए जाने के दौरान वहां यह नजारा देखने वालों का मजमा लग गया।
अभी पुल की जांच से संबंधित कई अन्य प्रक्रियाएं पूरी होनी शेष हैं। इससे तय सीमा से अधिक दिनों का समय लगने से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। जांच टीम के इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियर अश्विनी कुमार ने बताया कि रविवार से पुल के सभी स्पैन में वाइब्रेशन अर्थात कंपन की जांच शुरू होगी। इसके लिए पुल के निचले हिस्से में बल्लियों के सहारे पाड़ बनाने का काम शुरू होगा। पुल के सभी स्पैन की खिंचाव क्षमता की भी जांच होनी है। बताया कि यह सभी कार्य साेमवार तक किए जाने हैं, लेकिन सभी जांचें दिन में होने से इसमें थोड़ा ज्यादा वक्त भी लग सकता है।