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Shahjahanpur News: दुष्कर्म के मामले में अदालत में हाजिर नहीं हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मयानंद

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संवाद न्यूज एजेंसी
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शाहजहांपुर। शिष्या से दुष्कर्म के 11 साल पुराने मामले में समय सीमा गुजरने के बाद भी पूर्व केंद्रीय गृहराज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद अदालत में हाजिर नहीं हुए। एक दिसंबर को मामले में एमपीएमएल कोर्ट/एसीजेएम तृतीय में तारीख लगी है। चिन्मयानंद के खिलाफ अदालत पहले ही गैर जमानती वारंट जारी कर चुकी है।
पूर्व केंद्रीय गृहराज्य मंत्री एवं मुमुक्षु आश्रम के अधिष्ठाता चिन्मयानंद पर उनकी शिष्या ने 2011 में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार ने केस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की थी। पीड़िता के आपत्ति जताने पर अदालत ने केस वापसी का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया था। साथ ही जमानती वारंट भी जारी कर दिया था। बाद में एमपीएमएल कोर्ट/एसीजेएम तृतीय ने अदालत में हाजिर न होने पर चिन्मयानंद के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया था। इस मामले में अदालत ने कोतवाली इंस्पेक्टर को फटकार भी लगाई थी। स्वामी चिन्मयानंद ने मुकदमा वापसी के लिए उच्च न्यायालय इलाहाबाद में अपील की थी। यहां से उनकी अपील खारिज कर दी गई थी। बाद में चिन्मयानंद ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। यहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील खारिज करते हुए स्थानीय अदालत में 30 नवंबर तक हाजिर होने का आदेश दिया था। समय गुजरने के बाद भी चिन्मयानंद अदालत में हाजिर नहीं हुए हैं। एक दिसंबर को एमपीएमएल कोर्ट/एसीजेएम तृतीय में केस की तारीख लगी हुई है। चिन्मयानंद के अधिवक्ता फिरोज हसन खां ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने चिन्मयानंद को 30 नवंबर तक का समय आत्मसमर्पण के लिए दिया था। हमारा न्याय प्रणाली में पूरा विश्वास है। आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया का पालन करते हुए अमल में लाई जाएगी।
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2019 में छात्रा ने लगाया था दुष्कर्म का आरोप
स्वामी चिन्मयानंद पर एलएलएम कर रही एक छात्रा ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था। इस मामले में कई वीडियो भी वायरल हुए थे। चिन्मयानंद ने भी छात्रा और उसके साथियों पर रंगदारी मांगने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। मामले में दोनों पक्षों को जेल जाना पड़ा था। बाद में अदालत में छात्रा अपने आरोपों से मुकर गई थी। तब दोनों पक्षों को अदालत ने बरी कर दिया था।
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