खुटार। जंगल में कटान के मामले सामने आने से एक ओर जहां पेड़ों को नुकसान पहुंच रहा है तो वहीं दूसरी ओर एक पखवाड़े में आग लगने की कई घटनाएं होने से पौधों को हानि पहुंच रही है। इन्हें रोकने में वनकर्मी नाकाम नजर आ रहे हैं।
30 मार्च को गांव सराय के पास जंगल में आग बुझाने के दौरान गांव महुआ पिमई निवासी 60 वर्षीय कृष्णपाल की मौत हो गई थी। दो अप्रैल को गांव लौहंगापुर के पास जंगल में आग लगी तो रेंजर मनोज श्रीवास्तव ने ग्रामीणों की मदद से आग बुझाई थी। तीन अप्रैल की रात 10 पेड़ काटे जाने वाले स्थान के पास छह अप्रैल को आग लग गई। यह भी बमुश्किल बुझाई जा सकी।
खुटार रेंज के सिहुरा वन चौकी क्षेत्र में 15 दिन के अंदर कई स्थानों पर आग लगने से छोटे-छोटे पौधों का काफी नुकसान हो गया है।
रास्ते में चलने वाले और पशु चराने वाले लगा देते हैं आग
- जंगल में आग लगने की घटनाओं को विभाग के अधिकारी बड़ी बात नहीं मान रहे हैं। जबकि, जंगल में पशुओं को चराने वाले पतझड़ में इसलिए आग लगाते हैं कि पतझड़ जल जाने से नीचे नई घास उग आती है। इससे पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था हो जाती है। इसके अलावा जंगल के अंदर कई रास्तों से निकलने वाले लोग बीड़ी, सिगरेट आदि पीकर फेंक देते हैं, इससे भी आग लग जाती है। वनकर्मी जंगल में जाने वाले लोगों पर रोक नहीं लगा पा रहे हैं।
कटान के मामले की जांच चल रही है। जंगल में पतझड़ के बाद आग की घटनाएं होती रहती हैं। इसे समय रहते बुझा लिया जाता है और पेड़ों को नुकसान नहीं होता।
-डॉ. सुशील कुमार, एसडीओ, वन विभाग, शाहजहांपुर