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डूब क्षेत्र में पहले निर्माण और अब मुश्किलों से नजरें फेरीं

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शाहजहांपुर। शहर में खन्नौत नदी किनारे लोधीपुर पुल से लेकर हजरत बूलन शाह उर्फ दादा मियां की दरगाह तक प्रशासन ने बाढ़ क्षेत्र घोषित कर रखा है। बावजूद दो दशक से नदी की जमीनों पर कब्जा कर लोग मकान बनाते रहे। प्रशासन उन्हें कभीकभार नोटिस जारी कर निर्माण की ओर आंखें फेरे रहा। अब जब ये मकान बाढ़ में चौतरफा घिर गए हैं तो इनमेें रहने वालों को अधिकारियों ने उन्हीं के हाल पर छोड़ रखा है।
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दो दशक पहले जिले की महायोजना में लोधीपुर के खन्नौत पुल से लेकर सूफी संत हजरत बूलनशाह मियां की दरगाह तक नदी किनारे 119 गाटा नंबरों की जमीनों को फ्लड जोन (बाढ़ क्षेत्र) घोषित किया गया लेकिन सिस्टम की अनदेखी के चलते वहां दर्जनों पक्के मकान और दुकानें बना ली गईं। शहर का पुराना मोहल्ला लोधीपुर खन्नौत नदी से काफी फासले और ऊंचाई पर बसा है लेकिन बीते एक दशक से आबादी का विस्तार सड़क और रेलवे पुल तक फ्लड जोन के हिस्से में हो रहा है। बाढ़ क्षेत्र की जमीनों पर अवैध निर्माण कराने में राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों समेत सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। क्षेत्र के व्यापारी नेता अनीस खां ने अवैध कब्जों के खिलाफ आवाज भी उठाई, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। पिछले माह एक शिकायत पर जांच करने लोधीपुर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट आशीष कुमार सिंह ने नगर निगम के एक कर्मचारी को नदी किनारे बरातघर बनवाने में लिप्त पाया था। सिटी मजिस्ट्रेट ने बरात घर का निर्माण कार्य रुकवा दिया लेकिन अब वहां भी चार-पांच फुट पानी भर गया है। लोधीपुर की मुख्य सड़क से दक्षिण की ओर अंदर गलियों में कई रास्ते डूबे और कई मकान पानी से घिरे दिख रहे हैं।
इंदिरानगर में रहने वालों ने खुद मोल लिया खतरा
ढाई दशक पहले यह कॉलोनी फ्लड जोन के मानकों को अनदेखा करके खन्नौत नदी के बिल्कुल किनारे तटबंध के पास विकसित हो गई। चूंकि, इसी कॉलोनी में कई माननीयों के आवास बने हैं इसलिए सरकारी तंत्र चुप्पी साधे रहा। अब वहां तक खन्नौत की बाढ़ हिलोरें ले रही है।
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हनुमत धाम के पास भी खूब बने मकान-दुकान
बिसरात-केरूगंज मार्ग स्थित एक कॉलोनी भी बाढ़ की आपदा से बेपरवाह होकर अस्तित्व में लाई गई। खन्नौत उफनाने पर उसका पानी नाले के रास्ते कॉलोनी के पूर्वी दिशा में पहुंच गया। अंटा चौराहा से बंका घाट तक खन्नौत के पश्चिमी तट की जमीनों को मिट्टी से पाटकर कई भू माफिया ने कब्जा कर लिया और वहां मकानों के साथ व्यावसायिक उद्देश्य से तमाम पक्के निर्माण करा लिए। यही हाल, हनुमत धाम के पीछे का है और वहां भी कई मकान अभी जलमग्न हैं।
नदियों के आसपास जो जमीनें बाढ़ क्षेत्र में शामिल की गई हैं, वहां मकान बनाकर रहना अपनी जिंदगी को खतरे मे डालने के साथ कानूनन अपराध भी है। ऐसे लोगों को पहले भी नोटिस देकर पक्का निर्माण हटाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। बाढ़ क्षेत्र की जमीनों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी गई है। नदियों के किनारे जो मकान जलमग्न हुए हैं, उनके मालिकों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। इन सभी को जल्द नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - आशीष कुमार सिंह, नियत प्राधिकारी (विनियमित क्षेत्र)/सिटी मजिस्ट्रेट
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