जलालाबाद। सहकारी समिति के कर्मचारियों की मनमानी के कारण किसान परेशान हैं। बुधवार को गुरुगवां साधन सहकारी समिति के गोदाम पर सुबह से लाइन में लगे किसानों को खाद नहीं मिली तो वे आक्रोशित हो उठे। उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। नायब तहसीलदार ने मौके पर आकर खाद वितरण के लिए टोकन व्यवस्था लागू कराई।
इन दिनों आलू की गड़ाई और गेहूं की फसल की तैयारी में लगे किसानों में डीएपी की भारी मांग है। बुधवार को गुरुगवां समिति पर खाद के लिए बड़ी संख्या में किसान सुबह से ही आकर कतार में लग गए। जरूरतमंद किसानों से उनके आधार कार्ड आदि जमा करा लिए गए। बताते हैं कि गोदाम पर खाद कम होने की बात कहकर किसानों को उनकी मांग से कम खाद की बोरियां दी जा रही थीं। इसी दौरान वहां पहुंचे खखूंड़ी गांव के असरदार किसान को इंतजार कराए बगैर 90 बोरी डीएपी दे दी गईं। एक अन्य काश्तकार को भी 50 बोरी खाद पकड़ा दी गई।
इससे वहां मौजूद अन्य काश्तकार भड़क गए और सचिव पर खाद वितरण में मनमानी करने का आरोप लगाते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। इस बीच, कुछ लोगों ने समिति के गोदाम में मौजूद कर्मचारियों से खाद की बोरियां छीनने का भी प्रयास किया। सूचना पाकर नायब तहसीलदार रोहित कटियार और थाना प्रभारी प्रदीप राय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और किसानों से बात कर उन्हें समझाया। किसानों ने आरोप लगाया कि सैकड़ों छोटे काश्तकार दो बोरी डीएपी के लिए तीन-तीन दिन से भटक रहे हैं, जबकि असरदारों को सौ-सौ बोरियां बांटी जा रही हैं।
इस पर वहां मौजूद समिति के सचिव ओमप्रकाश शुक्ल ने सफाई दी कि उनकी समिति में आसपास के 11 गांव संबद्ध हैं ओर एक साथ सभी गांवों के किसानों में खाद वितरित करना संभव नहीं है। सचिव ने बताया कि मंगलवार को आईं 800 बोरी डीएपी बांटी जा रही है। बड़े काश्तकारों को उनके रकबे के अनुसार ज्यादा खाद देनी होती है। नायब तहसीलदार ने सचिव को निर्देश दिए कि लाइन में लगे किसानों को टोकन नंबर जारी कर क्रम के अनुसार खाद वितरित कराने के निर्देश दिए हैं।