जिला कारागार में क्षमता 511 के सापेक्ष तीन गुने से अधिक बंदी होने से उन्हें रात में बैरकों में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि प्रत्येक बैरक में 150 से 200 बंदी तक रह रहे हैं। बंदियों का दिन तो कट जाता है पर उमस भरी रात में सोने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इससे बंदियों में बीमारी फैलने की संभावना भी प्रबल हो गई है। हालांकि जेल प्रशासन का दावा है कि कम जगह के बाद भी बंदियों का पूरा ध्यान रखा जाता है। जिला कारागार में बनाई गई 26 बैरकों में 511 बंदियों को रखने की क्षमता है लेकिन अपराधियों की संख्या बढ़ने पर क्षमता से तीन गुना से भी ज्यादा 1826 हो गई है। इस कारण बैरकों में रात दिन रहना उनके लिए मुसीबत बनता जा रहा है। सूत्रों की माने तो बैरक में बंदियों की संख्या अधिक होने के कारण कुछ बंदी बीमार भी हो रहे हैं लेकिन जेल प्रशासन उनका अस्पताल में उपचार करा देता है। इधर, बंदियों की अधिक संख्या होने और स्टाफ कम होने के कारण जेल प्रशासन को भी काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।